सुरक्षाबलों की नई चिंता: आतंकियों के पास आई बुलेटप्रूफ बंकर तक भेदने वाली स्टील की गोली

आतंकवादी अब AK-47 में स्टील से बनी गोली का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन गोलियों में आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान इस्तेमाल होने वाले बुलेट प्रूफ बंकरों को भी भेदने की क्षमता है.

सांकेतिक तस्वीर
राहुल विश्वकर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2018,
  • अपडेटेड 7:31 AM IST

कश्मीर में आतंकवादियों के पास एक ऐसा घातक हथियार आ गया है, जिसने सुरक्षाबलों के कान खड़े कर दिए हैं. दरअसल आतंकवादी अब ऐसी गोली का इस्तेमाल कर रहे हैं जो बुलेट प्रूफ बंकरों तक को भेदने में सक्षम है.

आतंकवादी अब AK-47 में स्टील से बनी गोली का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन गोलियों में आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान इस्तेमाल होने वाले बुलेट प्रूफ बंकरों को भी भेदने की क्षमता है.

अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की पहली घटना जनवरी में नए साल के मौके पर नजर में आई थी जब जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर के लेथपुरा में सीआरपीएफ के शिविर पर आत्मघाती हमला किया था. इस घटना में सेना द्वारा उपलब्ध कराई गई बुलेट प्रूफ ढाल के पीछे होने के बावजूद अर्धसैनिक बल के पांच में से एक कर्मी को गोली लग गई थी. उक्त हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हो गए थे.

एक विस्तृत जांच में यह बात सामने आई कि आतंकवादियों द्वारा क्लाश्निकोव (एके) राइफल से चलाई गई गोलियां स्टील से बनी थीं जो कि आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाकर्मियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बुलेटप्रूफ शील्ड में छेद करने में सक्षम हैं.

जांच में पता चला कि कवच तक को भेद देने वाली ये गोलियां कठोर स्टील या टंगस्टन कार्बाइड से बनी होती हैं. कश्मीर घाटी में आतंकवादी रोधी कार्यक्रमों में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि परिणाम सामने आने के बाद एहतियाती कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं.

अधिकारियों ने बताया कि आमतौर पर एके राइफल की गोलियों में सीसे का छर्रा होता है जो हल्के स्टील से ढका होता है और बुलेट प्रूफ ढाल को नहीं छेद सकता, लेकिन 31 दिसंबर, 2017 की मुठभेड़ के बाद ये सब बदल गया है.

आज ही केंद्र सरकार ने कश्मीर में जारी सीजफायर को हटाया है. ऐसे में सेना अब आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन आलआउट-2 जल्द ही शुरू करेगी.

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