तमिलनाडु में पी. जयराज और उनके बेटे फेनिक्स की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में एक और बड़ी घटना सामने आई है. पिता-पुत्र को लॉकडाउन का उल्लंघन करने के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहां से वे जिंदा नहीं लौटे. इस मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी की कोरोना से मौत हो गई है. घटना तूतीकोरिन की है, जहां पुलिस अधिकारी को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्पताल में दाखिल कराया गया था.
पिता-पुत्र के मौत के मामले में पॉल थुरई नाम के पुलिस अधिकारी को कस्टडी में लिया गया था. मौत मामले की जांच के लिए थुरई को सीबीसीआईडी ने कस्टडी में लिया था. बाद में सीबीआई ने भी इस अधिकारी को हिरासत में लिया था लेकिन पॉल थुरई की कोरोना से मौत हो गई है.
पॉल थुरई को हिरासत में लेने के साथ ही पता चला कि उन्हें कोरोना का संक्रमण है. कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद पॉल को इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया. परिवार वालों का आरोप था कि पॉल को सही इलाज नहीं दिया गया जिस कारण उनकी मौत हो गई. हालांकि इस आरोप के तुरंत बाद प्रशासन ने पॉल की एक तस्वीर जारी की जिसमें वे आईसीयू में भर्ती दिख रहे हैं. बाद में पॉल की इलाज के दौरान मौत हो गई. आरोपी अधिकारी पॉल थुरई सथानकुलम में स्पेशल सब-इंस्पेक्ट के पद पर तैनात थे.
बता दें, तूतीकोरिन हिरासत में मौत के मामले की जांच कर रही सीबीसीआईडी ने सब-इंस्पेक्टर रघु गणेश को गिरफ्तार किया था, जो इस मामले के सिलसिले में सस्पेंड थे. इसके अलावा चार और पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है. इसमें इंस्पेक्टर श्रीधर, सब इंस्पेक्टर बालाकृष्णन और कांस्टेबल मुथुराज और मुरुगन शामिल हैं. इससे पहले सीबी-सीआईडी ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था. मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने एक सुनवाई के दौरान कहा था कि हत्या के आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया सबूत हैं. इसके बाद सीबी-सीआईडी ने रघु गणेश और बालाकृष्णन के खिलाफ दर्ज केस में आईपीसी की धारा 302 को भी जोड़ दिया था.
अक्षया नाथ