देश की कुल आबादी का महज 1 फीसदी हिस्से वाले राज्य जम्मू-कश्मीर को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य से धारा 370 को हमेशा के लिए खत्म कर दिया और उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने का ऐलान कर दिया. अब जम्मू-कश्मीर के साथ लद्दाख भी केंद्रशासित प्रदेश होगा. बता दें कि आर्टिकल 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ था जिसके तहत राज्य का अपना कानून था और वहां कोई भी दूसरे राज्य का नागिरक जमीन तक नहीं खरीद सकता था.
जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 के खत्म होने के बाद अब वहां भी वही कानून लागू होगा जो भारत के दूसरे राज्यों में है. पाकिस्तान सीमा से सटे होने और विशेष राज्य के दर्जे की वजह से जम्मू-कश्मीर को सुरक्षित बनाए रखने के लिए भारत सरकार को अपनी कुल आमदनी का करीब 10 फीसदी हिस्सा सिर्फ इस राज्य पर खर्च करना पड़ता था.
केंद्र सरकार ने बीते 16 सालों (2000-2016) में प्रति कश्मीरी करीब 92 हजार रुपये हर साल खर्च किए हैं जबकि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति यह खर्च महज 43 हजार रुपये है. उत्तर प्रदेश की आबादी देश की कुल जनसंख्या का करीब 13 फीसदी है.
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक विशेष दर्जे वाले 10 राज्यों के मुकाबले कश्मीर को 25 फीसदी ज्यादा पैसे दिए गए हैं. इन 16 सालों में कश्मीर पर भारत सरकार ने करीब 1. 14 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं जबकि आजादी के बाद 70 सालों में इस राज्य को केंद्र सरकार चार लाख करोड़ से ज्यादा पैसे दे चुकी है.
ये तो आर्थिक मामलों की बात हुई अगर वहां सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो साल 1988 से 2019 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों और हिंसा में करीब 6500 जवान शहीद हुए हैं जबकि इस दौरान सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 23 हजार 640 आतंकी मारे गए हैं. इन सालों में राज्य में करीब 47 हजार 235 आतंकी हमले और हिंसा हुई है.
जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए भारत सरकार ने हमेशा से दिल खोलकर पैसे दिए और योजनाओं की बदौलत वहां गरीबी कम करने के लिए प्रतिबद्ध रही है. आंकड़ों के मुताबिक साल 1980 में जम्मू-कश्मीर की करीब 25 फीसदी जनता गरीबी रेखा से नीचे थी. बीते 20 सालों में यह घटकर सिर्फ 3 फीसदी रह गया है. 1991-92 में देश में प्रति व्यक्ति खर्च 576 रुपये था जबकि कश्मीर में उस वक्त भी प्रति व्यक्ति खर्च 3 हजार 197 रुपये था.
आपको बता दें कि भारत में रहकर ही पाकिस्तान के समर्थन में बातें करने वाले राज्य के अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर भी 100 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे जिसमें ज्यादा पैसा केंद्र सरकार देती थी. केंद्र सरकार जहां 90 फीसदी पैसा देती थी वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार 10 फीसदी पैसा सुरक्षा पर खर्च करती थी. हालांकि सरकार ने बीते साल अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा हटा दी थी.
गौरतलब है कि भौगौलिक, सामरिक और देश की अखंडता और सुरक्षा के नजरिए से जम्मू-कश्मीर भारत के लिए बेहद अहम राज्य है. प्राकृतिक संसाधनों से पूर्ण इस राज्य में हिमालय की चोटियां भारत को कमांडिंग हाइट्स देती हैं जिससे देश अपनी दुश्मनों पर नजर रखता है.
कुणाल कौशल