भारत में 15,488 पुलिस स्टेशन हैं. इनमें से 9932 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं. सिर्फ 5036 पुलिस स्टेशन शहरी क्षेत्रों के लिए हैं. इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2019 के अनुसार बड़े और मध्यम आकार के राज्यों में, शहरों में 33,000 से लेकर 2.40 लाख की आबादी पर एक पुलिस स्टेशन है. ग्रामीण क्षेत्रों में 30 हजार से लेकर 2.33 लाख की आबादी पर एक पुलिस स्टेशन है.
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस स्टेशन पर 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के आंकड़े उपलब्ध हैं. उनमें से 28 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में ग्रामीण क्षेत्र के एक पुलिस स्टेशन के दायरे में औसतन 150 वर्ग किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र आता है. जबकि, नेशनल पुलिस कमीशन के अनुसार इसे सिर्फ 150 वर्ग किलोमीटर होना चाहिए. वहीं, शहरी क्षेत्रों में एक पुलिस स्टेशन के दायरे मे आने वाला औसत क्षेत्र 20 वर्ग किलोमीटर से कम है.
इंडिया जस्टिस रिपोर्टः 4071 जजों के सर पर अदालत की छत ही नहीं है!
पुलिस बलों पर औसत खर्च होता है सिर्फ 820 रुपए
जनवरी 2017 को पूरे भारत में प्रति पुलिस बल औसत खर्च 820 रुपए मिला. अधिकांश बड़े और मध्यम आकार वाले राज्य पुलिस बल के लिए अपने कुछ बजट का 3 से 5 फीसदी खर्च करते हैं. वर्ष 2011-12 से वर्ष 2015-16 के बीच, केवल 10 राज्यों में पुलिस पर होने वाला खर्च प्रदेश के कुल खर्च में हुई वृद्धि से अधिक हुआ.
केंद्रीय गृह मंत्रालय नई इमारतों, तकनीक और बेहतर उपकरणों के जरिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण में सहायता करता है. वर्ष 2016-17 में केवल एक राज्य में ही इस योजना का पूरा उपयोग किया गया. जिन 19 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें इस स्कीम का 60 फीसदी से भी कम उपयोग किया गया.
इन 6 राज्यों की पुलिस में महिलाओं की भागीदारी 33% होने में लगेंगे 300 साल
देश की पुलिस बलों में सिर्फ 7 प्रतिशत महिलाएं ही हैं
पूरे देश में मात्र 7 फीसदी महिलाएं ही पुलिस बलों में शामिल हैं. कोई भी राज्य अपने यहां एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षित कोटे में पात्र महिला पुलिस अधिकारियों की पूरी बहाली नहीं कर पा रहा है. पूरे देशभर में न्याय और कानून व्यवस्था में महिलाओं की संख्या काफी कम है. पुलिस में मात्र 7% महिलाएं हैं. जेल कर्मचारियों में 10% महिलाएं हैं. उच्च न्यायालयों और अधीन न्यायालयों के सभी जजों में महिला जज करीब 26.5% ही हैं.
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट-2019 के अनुसार देश के 6 राज्य ऐसे हैं जहां की पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी 33% होने में 100 से 300 साल लग जाएंगे. हालांकि, जम्मू-कश्मीर में 10 गुना ज्यादा समय लगेगा. यानी वहां के पुलिस बल में महिलाओं को 33% भागीदारी मिलने में करीब 3535 साल लग जाएंगे. सिर्फ पुलिस ही नहीं, अदालतों में भी महिलाओं की भागीदारी कम है.
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्थाएं
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट टाटा ट्रस्ट्स, सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन कॉज, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिटिव, दक्ष, टीआईएसएस-प्रयास और विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी ने मिलकर बनाया है.
ऋचीक मिश्रा