JNU में खुला पहला कोरिया कॉर्नर, कोरिया के बारे में किया जा सकेगा अध्ययन

जेएनयू में भारत का पहला कोरिया कॉर्नर खुल गया है. यहां आधुनिक और परंपारगत कोरिया के बारे में जानकारी उपलब्ध हो सकेगी. कोरिया कॉर्नर को एंबेसी ऑफ रिपब्लिक ऑफ कोरिया और कोरिया फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित किया गया है.

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JNU में खुला पहला कोरिया कॉर्नर JNU में खुला पहला कोरिया कॉर्नर

राम कृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 8:38 PM IST

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हंगेल दिवस समारोह के दौरान सेंटर फॉर कोरियन स्टडीज और स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड कल्चरल स्टडीज में 'कोरिया कॉर्नर' का उद्घाटन किया गया. यह कोरिया पर आधारित भारत में पहला बहुउद्देशीय सांस्कृतिक और जनसूचना केंद्र है, जो एंबेसी ऑफ रिपब्लिक ऑफ कोरिया और कोरिया फाउंडेशन द्वारा समर्थित है.

इस कार्यक्रम में भारत में कोरिया के राजदूत HE शिन बोंगकिल, प्रोफेसर एससी गारकोती (Rector-II, JNU), प्रोफेसर राजेद्र डेंगले (स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चर स्टडीज के डीन), एंबेसी ऑफ रिपब्लिक ऑफ कोरिया के काउंसलर पार्क सो येओन, CKS के चेयरपर्सन डॉ. विजयंती राघवन, डॉ रविकेश, डॉ म्यूंग-ई ली, डॉ नीरजा समजदार, प्रोफेसर कौशल कुमार, प्रोफेसर सत्यांशु श्रीवास्ताव समेत अन्य लोग मौजूद रहे.

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कोरिया कॉर्नर के लिए जेएनयू ने जगह दी है.  कोरिया के बारे में जानने और सीखने के इच्छुक लोगों को कोरिया कॉर्नर  नए उपकरण, रिसर्च मटेरियल, एकेडेमिक बुक और ऑडियो-वीडियो कंटेंट उपलब्ध कराएगा. भारत में कोरिया के राजदूत ने कहा कि कोरिया कॉर्नर जेएनयू कैंपस में 'लिटिल कोरिया' की तरह है. यहां आधुनिक और परंपरागत कोरिया के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी. इस समारोह के दौरान कोरियाई लोक कहानियों की तीन किताबों को भी लॉन्च किया गया. इन किताबों का हिंदी, मराठी और तमिल अनुवाद किया गया है.

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