क्या है प्रोजेक्ट डॉल्फिन, जिसके लॉन्च का PM मोदी ने लाल किले से किया ऐलान

पीएम मोदी ने कहा कि हम नदी और समुद्री डॉल्फिन दोनों पर ध्यान केंद्रित करेंगे. ये बायो डायवर्सिटी को मजबूत करेगा, रोजगार के अवसर पैदा करेगा और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को किया संबोधित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को किया संबोधित

पॉलोमी साहा / मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST

  • लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने देश को किया संबोधित
  • प्रधानमंत्री ने प्रोजेक्ट डॉल्फिन को लॉन्च करने का किया ऐलान

74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोजेक्ट डॉल्फिन को लॉन्च करने का ऐलान किया. पीएम मोदी ने कहा, हम नदी और समुद्री डॉल्फिन दोनों पर ध्यान केंद्रित करेंगे. ये बायो डायवर्सिटी को मजबूत करेगा, रोजगार के अवसर पैदा करेगा और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा.

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अब ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है ये प्रोजेक्ट डॉल्फिन. दरअसल, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय 10 साल के प्रोजेक्ट गैंगेटिक डॉल्फिन का शुभारंभ करेगा. ये प्रोजेक्ट डॉल्फिन के संरक्षण को लेकर है. प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत नदियों और समुद्र दोनों ही जगहों पर मिलने वाली डॉल्फिन को संरक्षित किया जाएगा. डॉल्फिन मुख्य रूप से गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी, बांग्लादेश और नेपाल में इनकी सहायक नदियों में पाई जाती हैं.

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भारत में डॉल्फिन को असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में नदी के किनारे पाया जाता है. प्रोजेक्ट डॉल्फिन के लॉन्च के बारे में बोलते हुए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, इस परियोजना में आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से डॉल्फिन का संरक्षण शामिल होगा. यह मछुआरों और नदी और समुद्र पर निर्भर आबादी की आजीविका में सुधार के लिए प्रयास करेगा.

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साल 2019 में तीस डॉल्फिन पाई गईं

उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर से लेकर नरौरा तक का 86 किलोमीटर का गंगा क्षेत्र रामसर साइट कहलाता है. गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के पड़ोसी जनपद हापुड़ का गंगा क्षेत्र है. बताया जाता है कि इस क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या दुनिया की उनकी कुल आबादी के बारहवें हिस्से के बराबर है.

पहली बार वर्ष 1990 में रामसर साइट में डॉल्फिन देखी गई थी. उसके बाद लगातार गंगा की सफाई अभियान के दौरान डॉल्फिन की गिनती की जाती रही है. वन विभाग के फॉरेस्ट ऑफिसर गंगा प्रसाद बताते हैं, WWF लगातार इस क्षेत्र में डॉल्फिन संरक्षण के कार्य में जुटी है. इस क्षेत्र में साल 2019 में करीब तीस डॉल्फिन पाई गई थीं.

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