विदेशी महिला ने परिवार समेत की मुंबई के वसई बीच की सफाई, लोग बोले- हम हैं शर्मिंदा

मुंबई के वसई में रहने वाली हंगरी मूल की महिल जुसुस्ना फेराओ ने मुंबई के तटीय इलाकों की साफ सफाई कर रही है. इस अभियान में उनके पति लिसबन, तीन साल का बेटा लुसियस और नास्चा भी उनका साथ दे रहे हैं.

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हंगरी मूल की महिला जुसुस्ना फेराओ, पति और बेटों के साथ हंगरी मूल की महिला जुसुस्ना फेराओ, पति और बेटों के साथ

मोहित ग्रोवर

  • मुंबई,
  • 25 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 8:08 PM IST

मुंबई के वसई में रहने वाली हंगरी मूल की महिला जुसुस्ना फेराओ ने मुंबई के तटीय इलाकों की साफ सफाई की. इस अभियान में उनके पति लिसबन, तीन साल का बेटा लुसियस और नास्चा भी उनका साथ दे रहे हैं. उनके पति लिसबन के मुताबिक वह पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत मुंबई के तटीय इलाकों की साफ-सफाई कर रहे हैं. जुसुस्ना ने कहा कि हम हफ्ते में एक बार तटीय इलाकों की सफाई जरूर करते हैं. अब इस काम में स्थानीय लोग भी हमारा साथ दे रहे हैं.

ऐसे हुई शुरुआत
दरअसल कुछ हफ्ते पहले जुसुस्ना फेराओ ने वसई के पास रंगन समुद्र तट के पास कुछ बच्चों को कचरे से खेलते हुए देखा था. यह देखकर वह काफी परेशान हो गई और हर रविवार दोनों ने कचरा इकट्ठा करने का फैसला किया. पति लिसबन के मुताबिक उनकी पत्नी को समुद्र और वहां पर बच्चों के साथ खेलना काफी पसंद है लेकिन जब उसने समुद्र के पास जूते-चप्पल, शराब की बोतलें और कचरा देखा तब उसने यहां सफाई अभियान शुरू किया. वहीं जुसुस्ना ने कहा कि बच्चों को बच्चों को रेत की तरह प्राकृतिक चीजों के साथ खेलना चाहिए, न कि शराब की बोतलों के साथ.

इस तरह से करते हैं बीच की सफाई

जुसुस्ना और उनका पूरा परिवार हर रविवार समुद्र तट से दो बैग भरकर कचरा इकट्ठा करते हैं. इसके बाद उस कचरे को नगरपालिका के कचरा घर में डाल कर आते हैं. जुसुस्ना कहती हैं मेरे देश में कोई समुद्र नहीं है, लेकिन वहां बहुत सी नदियां और लेक हैं जो हमेशा साफ रहते हैं. मैं भारत को अपने देश के रूप में मानती हूं और विश्वास करती हूं कि हमें इसे साफ रखने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए. वहीं पति लिस्बन के मुताबिक थिएटर में राष्ट्रगान के वक्त खड़े हो जाना काफी नहीं है. हमें अपने काम के जरिए अपने देश से प्यार करना चाहिए.

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रंगगांव बीच के पास रहने वाले रमेश कहते हैं कि मैं इस फैमली को कचरा उठाते हुए देखता हूं. तो काफी शर्मिंदगी महसूस होती है कि बाहर से आकर लोग हमारी गंदगी को उठा रहे हैं. हम सभी को इनसे सीख लेनी चाहिए.

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