गंगा में गंदगी करने पर होगी 7 साल की सजा, लगेगा 100 करोड़ का जुर्माना!

गंगा नदी को गंदा करना अब आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. गंगा में गंदगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें 7 साल जेल की सजा और 100 करोड़ का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

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गंगा में गंदगी करने पर सख्त सजा का प्रस्ताव गंगा में गंदगी करने पर सख्त सजा का प्रस्ताव

जावेद अख़्तर / रीमा पाराशर

  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2017,
  • अपडेटेड 7:58 PM IST

गंगा नदी को गंदा करना अब आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. गंगा में गंदगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें 7 साल जेल की सजा और 100 करोड़ का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
 सरकार की तरफ़ से बनी एक्सपर्ट की कमिटी ने नमामि गंगे के तहत जल संसाधन मंत्रालय को नेशनल रिवर गंगा (रीजुवेनेशन, प्रोटेक्शन और मैनेजमेंट) बिल 2017 सौंप दिया है, जिसमें गंगा के गुनहगारों से सख़्ती से पेश आने की बात की गई है.
कमिटी ने ड्राफ़्ट बिल में आस्था के मुद्दे पर रियायत बरती है यानी गंगा में स्नान करने फूल डालने या शवों को डालना जुर्म के दायरे में नहीं आएगा. लेकिन गंगा को प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभाने वाले सीवेज डिस्चार्ज करने पर 5000 रुपए प्रतिदिन जुर्माना लगेगा. इसके अलावा प्लास्टिक या कचरा गंगा के पानी में बहाने वालों को एक महीने जेल में काटने पड़ सकते हैं.
एक्सपर्ट्स ने गंगा को जन आंदोलन बनाते हुए गंगा वालंटियर्स फ़ोर्स बनाने की बात कही है और नदी के किनारे वॉटर सेविंग ज़ोन फ़िक्स करने का प्रावधान जोड़ा है. इस बिल पर मंत्रालय राज्यों से बात करेगा और उसके बाद फाइनल बिल पास होने के लिए रखा जाएगा.
केंद्र सरकार ने गंगा नदी की सफाई को लेकर एक पैनल का गठन किया था. इस पैनल ने नेशनल रीवर गंगा (कायाकल्प, संरक्षा और प्रबंधन) बिल ,2017 के रूप में मसौदा तैयार किया है. इसके मुताबिक गंगा को मैला करने के अलावा बिना अनुमति के नदी की धारा को रोकना, नदी के तटों का खनन और गोदी (जेट्टी) का निर्माण भी शामिल है.

प्रस्ताव के मुताबिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 7 साल की सजा और 100 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. अगर ये प्रस्ताव पास होकर कानून की शक्ल लेता है तो गंगा को प्रभावित करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

सेवानिवृत्त जस्टिस गिरधर मालवीय के नेतृत्व में इस कमेटी ने यह भी सुझाव दिया है कि गंगा से जुड़ी उसकी प्रमुख सहायक नदियों के भी एक किलोमीटर के दायरे को 'जल संरक्षित जोन' घोषित किया जाए. हालांकि कमेटी ने यह भी सुझाव दिया है कि यह जोन बिल के लागू होने के बाद छह महीने के अंदर वैज्ञानिक शोध करके बनाये जाएं.

बता दें कि गंगा को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जीवित व्यक्ति का दर्जा दिए जाने की बात कही थी. वहीं दूसरी तरफ आजतक से खास बातचीत में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने 2018 तक गंगा को निर्मल और स्वच्छ करने का वादा किया था.

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