EXCLUSIVE: 'सार्स' और 'मार्स' वायरस के परिवार का ही सदस्य है कोरोना वायरस

डॉक्टर ऋषि ने कहा कि कोरोना वायरस सार्स या SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) जिसे SARS coronavirus (SARS-CoV) कहते हैं. मार्स को Middle East respiratory syndrome coronavirus (MERS-CoV) भी कहते हैं, इसी परिवार का हिस्सा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटोः PTI) प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटोः PTI)

राम किंकर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 8:31 AM IST

  • एमिटी के प्रोफेसर ने किया दावा
  • कहा- यूज की जा रही वही दवा

दुनिया के लिए सरदर्द बन चुके कोरोना वायरस की चपेट में आकर दुनिया में अब तक हजारों नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं. लाखों लोगों इस खौफनाक बीमारी से जूझ रहे हैं. भारत समेत दर्जनों देशों ने इस बीमारी से लड़ने के लिए लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है. दुनिया के डॉक्टर्स इस बीमारी का इलाज ढूंढ़ने में जुटे हुए हैं. इन सबके बीच कोरोना वायरस को लेकर अहम जानकारी दी है एमिटी यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी में एडवाइजर प्रोफेसर डॉक्टर नारायण ऋषि ने.

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डॉक्टर ऋषि ने कहा कि कोरोना वायरस सार्स या SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) जिसे SARS coronavirus (SARS-CoV) कहते हैं. मार्स को Middle East respiratory syndrome coronavirus (MERS-CoV) भी कहते हैं, इसी परिवार का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि कभी इन दोनों ने भी दुनिया को डराया था. पर अब इनके परिवार कोरोना विरडी का ही कोरोना वायरस दहशत फैला रहा है. डॉक्टर ऋषि ने कहा कि आप को जानकर हैरानी होगी कि अभी तक कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज भी इन्हीं दोनों वायरस के दौरान होने वाले इलाज पर आधारित है या उसे ही आधार बनाकर किया जा रहा है. ऐसा इसलिए, क्योंकि तीनों एक ही परिवार से है और सभी एक दूसरे से मिलते-जुलते हैं.

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उन्होंने बताया कि कोरोना आरएनए वायरस है. किसी भी वायरस की स्पेशिफिक एंटीवायरल ड्रग होती है, कोरोना वायरस की दवा अभी तक बनी नहीं है. इन दो वायरस के ऊपर जो दवाइयां यूज हुई थीं, उन्ही का इस्तेमाल हो रहा है. इनका न्यूक्लिक एसिड (किसी भी जीवित व्यक्ति/वायरस के सारे गुण) बहुत मिलता-जुलता है. मलेरिया के दौरान इस्तेमाल होने वाली Chloroquine दवा का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.

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ऐसे रूकेगी कोरोना की चेन रिएक्शन

कोरोना मनुष्य से मनुष्य में फैला, लेकिन किसी को पता नहीं चला. इसलिए अब तक ये डेवलप कर रहा है. पिछले 40 साल से वायरोलॉजी में काम करने वाले नारायण ऋषि का कहना है कि अपने देश में इसलिए मौत का आंकड़ा कम है, क्योंकि मरने वालों में ऐसे लोग हैं जिनका इम्यून सिस्टम यानी बीमारी रोधक क्षमता कम थी. जैसे बुजुर्ग या फिर डायबिटीज या बीमारी से संक्रमित कोई युवा.

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छींक, खांसी के दौरान बलगम, आमने सामने बातचीत के दौरान छींटे आने पर ये और फैलेगा. ऐसे में कोशिश करें कि आप से निकली ये चीजें आप तक ही रहें. 31 दिसंबर 2019 को चीन ने माना कि ये कोरोना वायरस है, जबकि 15 जनवरी 2020 को यूएस ने कहा कोरोना है.

कोरोना क्यों नाम पड़ा

कोरोना शब्द स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है सिंहासन. ये बहुत छोटा है. इलेक्ट्रॉनिक माइक्रो स्कोप से ढाई लाख गुना बढ़ाकर दिखलाई देता है. इसका शेप सिंहासन जैसा है. वायरस अभी तक आदमी से आदमी में फैला है और रिपोर्ट कहती है कि ये चमगादड़ से निकला है.

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चमगादड़ वायरस का स्वर्ग

चमगादड़ ऐसा जानवर है, जिस पर सौ से ज्यादा वायरस जिंदा रहते हैं. फिर भी इसे कुछ नही होता. कुछ देशों में चमगादड़ खाया जाता है. उसका सूप पिया जाता है. कुत्ते पर भी ये वायरस देखा गया है. किसी मच्छर से ये वायरस फैलता है, अब तक इसके प्रमाण नहीं मिले हैं.

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