कोरोना काल और चुनावी साल....ममता बनाम केंद्र का अखाड़ा बना बंगाल

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में साल भर का समय भी नहीं रह गया है, जिसके चलते कोरोना संकट की महामारी पर सीएम ममता बनर्जी और केंद्र सरकार आरपार के मूड में उतर आई हैं. कोरोना संकट का एक दूसरे पर आरोप मढ़ने और श्रमिकों की वापसी का क्रेडिट लेने की कवायद हो रही है.

पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम ममता बनर्जी
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2020,
  • अपडेटेड 4:09 PM IST

  • पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं
  • कोरोना पर ममता और मोदी सरकार आमने-सामने
  • केंद्र-राज्य के बीच लड़ाई में फंसे प्रवासी मजदूर

कोरोना वायरस संकट के बीच पूरा देश एकजुट होकर कोरोना से लड़ रहा है तो दूसरी तरफ बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच दिनोंदिन टकराव बढ़ता जा रहा है. कोरोना जांच में गड़बड़ी, लॉकडाउन का पालन नहीं करने और प्रवासी श्रमिकों की वापसी के मुद्दे पर आपसी मतभेद और टकराव के बाद अब विमान सेवा को लेकर भी पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार आमने-सामने है.

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में साल भर का समय भी नहीं रह गया है, जिसके चलते दोनों पार्टियां आरपार के मूड में उतर आई हैं. कोरोना संकट में ममता बनर्जी और केंद्र की मोदी सरकार में सीधे टकराव बढ़ गया है और एक-दूसरे को नीचा दिखाकर दोषी ठहराने और क्रेडिट लेने की होड़ साफ नजर आ रही है.

टीएमसी महासचिव पार्थ चटर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि विदेश में रहने वाले पश्चिम बंगाल के लोगों की वापसी के लिए केंद्र सरकार कोई विमान मुहैया नहीं करा रही है. क्या विदेश मंत्रालय (एमईए ) हमें यह मानने के लिए कह रहा है कि जॉर्जिया से गुजरात आने के लिए पर्याप्त लोग हैं, लेकिन कोई भी कोलकाता नहीं आना चाहता है? किर्गिस्तान से बिहार वापस आने के लिए पर्याप्त लोग हैं, लेकिन बंगाल वापस लाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं?

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टीएमसी द्वारा लगाए गए आरोप पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्वीट कर कहा कि विदेश मंत्रालय राज्यों के बीच भेदभाव नहीं करता है. भारत सरकार का वंदे भारत मिशन सभी फंसे हुए भारतीयों के लिए है, जिनमें पश्चिम बंगाल के लोग भी शामिल हैं. इनमें से 3,700 से अधिक ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों से प्रत्यावर्तन के लिए पंजीकरण किया है. उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार लोगों के लाने और क्वारनटीन की व्यवस्था की पुष्टि करेगी, तो कोलकाता के लिए उड़ानों की सहूलियत होगी.

लॉकडाउन में फंसे श्रमिकों की वापसी को लेकर ममता बनर्जी और रेलमंत्री के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है. ममता बनर्जी ने गुरुवार को ट्वीट कर जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल के फंसे हुए लोगों को वापस लाने 105 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की गई है. अगले कुछ दिनों में ये ट्रेनें देश के अलग-अलग हिस्सों से बंगाल के लिए चलेंगी.

वहीं, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के लिए 30 दिनों के लिए मात्र 105 ट्रेन की मांग करना उनके साथ क्रूर मजाक है. इस तरह से एक महीने में एक लाख ही मजदूर आ सकेंगे. पश्चिम बंगाल को अभी 105 ट्रेन रोजाना चलाने की आवश्यकता है. बंगाल सरकार ने पिछले हफ्ते की घोषणा के मुताबिक 8 ट्रेनों को भी चलाने नहीं दिया है. ऐसे में गरीब मजदूरों को घर तक पहुंचाने की अपनी जिम्मेदारी से बंगाल सरकार भाग रही है.

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अमित शाह ने ममता बनर्जी को लिखी अपनी चिट्ठी में कहा था, दूसरे राज्य में मौजूद बंगाल के मजदूर अपने राज्य आना चाहते हैं, लेकिन राज्य सरकार का रवैया ठीक नहीं है. लोगों को अपने यहां लाने में बंगाल सरकार तत्परता नहीं दिखा रही और राज्य में ट्रेनों को प्रवेश करने की मंजूरी नहीं दे रही है. ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में इस मसले को उठाते हुए राजनीति करने का आरोप लगाया.

ममता ने पश्चिम बंगाल में कम संख्या में होने वाली टेस्टिंग और अधूरे परिणामों के लिए केंद्र द्वारा त्रुटिपूर्ण टेस्ट किटों की आपूर्ति को दोष दिया. ममता ने केंद्र पर लॉकडाउन और एयरपोर्टों को बंद करने के कदम में देरी का भी आरोप लगाया. वहीं गृहमंत्रालय ने पत्र और केंद्रीय टीम भेजकर संकट से ठीक से नहीं निपटने के लिए ममता बनर्जी सरकार से जवाब तलब किया तो बीजेपी से लेकर केंद्र सरकार से जवाबी हमले शुरू हो गए.

सीएम ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से भी उनकी निरंतर तकरार चलती रही है. राज्यपाल मीडिया में आकर कोरोना संकट में ममता सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए. कोरोना का डेटा छुपाने से लेकर राशन वितरण में कालाबाजारी से लेकर संकट की गंभीरता को कम करके दिखाने व जनस्वास्थ्य स्थिति के पूरी तरह टीएमसी सरकार के नियंत्रण में होने का आरोप राज्यपाल ने लगाया था. इस पर ममता सरकार ने राजनीतिक करने का आरोप लगाया था.

दरअसल इस सियासी तकरार के पीछे पश्चिम बंगाल में 2021 होने वाले चुनाव के मद्देनजर देखा जा रहा है. सूबे में बीजेपी का ग्राफ 2019 के लोकसभा चुनाव में बढ़ा है, जिसके बाद अब उसकी नजर प्रदेश की सत्ता पर है. वहीं, ममता अपने सियासी दुर्ग पर हर हाल में काबिज रहना चाहती है. इसी वजह से कोरोना के बहाने में ममता और बीजेपी अपने-अपने सियासी आजमाइश कर रहे हैं और अब श्रमिकों की वापसी की क्रेडिट लेने की होढ़ मची है.

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