लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए हुए एक महीना हो रहा है, लेकिन कांग्रेस के दिग्गजों ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश नहीं की. यही वजह है कि राहुल गांधी ने बुधवार को यूथ कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात के दौरान कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनके पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद भी कांग्रेस शासित राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों, महासचिवों, प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं को अपनी जवाबदेही का अहसास नहीं हुआ.
राहुल गांधी का दर्द छलकने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों पर दबाव बढ़ गया है. इसी का नतीजा था कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को कहा, 'राहुल गांधी सही है. मैं नहीं जानता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है. लेकिन मैंने पहले इस्तीफे की पेशकश की थी. हां, मैं हार का जिम्मेदार हूं. मुझे दूसरे नेताओं के बारे में पता नहीं है.'
मौजूदा समय में राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है. इसके अलावा केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी में कांग्रेस सरकार है और कर्नाटक में जेडीएस के साथ मिलकर सत्ता में भागीदार है. इस बार लोकसभा चुनाव में पंजाब और पुडुचेरी छोड़कर बाकी राज्यों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है.
राजस्थान में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला और मध्य प्रदेश में महज एक ही सीट पर जीत मिली है. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को महज 2 सीटें मिली है. जबकि इन तीनों राज्यों में कांग्रेस दिसंबर, 2018 में बीजेपी के मात देकर सत्ता में आई थी. वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस को महज एक सीट मिली है. ग्रेस इन राज्यों में बीजेपी से मुकाबला नहीं कर सकी और करारी हार का उसे सामना करना पड़ा.
ऐसे में सवाल उठता है कि राहुल की टिप्पणी सामने आने के बाद क्या कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देंगे. खासकर मध्य प्रदेश के कमलनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, क्योंकि राहुल ने 25 मई की कांग्रेस कार्यसमिति बैठक में इन्हीं दोनों नेताओं को लेकर गुस्से का इजहार किया था.
राहुल ने कहा था कि कांग्रेस ने उन राज्यों में भी बहुत खराब प्रदर्शन किया है, जहां उनकी सरकार थी. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने अपने बेटों को टिकट देने पर जोर दिया. इसका नतीजा था कि दोनों नेता पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार के बजाय अपने-अपने बेटे को जिताने पर ज्यादा जोर दिया और पार्टी को प्रदेश में हार का मुंह देखना पड़ा. ऐसे में कांग्रेस की हार के लिए कांग्रेस अध्यक्ष के साथ-साथ मुख्यमंत्रियों की भी जवाबदेही बनती है. राहुल के बयान के बाद क्या मध्य प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्री के चेहरे बदल जाएंगे?
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कुबूल अहमद