प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ सत्ता में वापसी करने में भले ही कामयाब रही हो, लेकिन दक्षिण भारत में कर्नाटक-तेलंगाना छोड़ बाकी राज्यों में उसके हाथ कुछ नहीं लगा है. यही वजह है कि उत्तर भारत के बाद बीजेपी दक्षिण भारत के राज्यों में कमल खिलाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. मिशन साउथ के तहत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लिए एक खास प्लान बनाया है. इसके तहत बीजेपी तेलंगाना में कांग्रेस और आंध्र प्रदेश में तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) की जगह लेने की कोशिश में जुट गई है.
तेलंगाना में बीजेपी का प्लान
लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की 17 संसदीय सीटों में से टीआरएस 9, बीजेपी 4, कांग्रेस 3 और AIMIM को 1 सीट मिली है. इसी तरह से पिछले साल हुए राज्य विधानसभा चुनाव में कुल 119 सीट में से टीआरएस 88, कांग्रेस 19, AIMIM 7, बीजेपी 1, टीडीपी 1 और एक सीट अन्य को मिली थी. दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के कई विधायक बगावत कर टीआरएस के साथ जुड़ गए हैं. वहीं, लोकसभा चुनाव में बीजेपी जिस तरह से अपना ग्राफ बढ़ाने में कामयाब रही है और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है. इससे बीजेपी के हौसले बुलंद हो गए हैं.
रेड्डी समुदाय पर नजर
तेलंगाना में बीजेपी की नजर कांग्रेस और टीडीपी के ऐसे नेताओं पर है जो अपनी-अपनी पार्टी से नाखुश हैं. इसके अलावा बीजेपी यहां कांग्रेस के रेड्डी समुदाय को साधने के साथ-साथ दलित और अन्य पिछड़ी जाति के वोटों को जोड़ने पर लगी है. ऐसे में बीजेपी को लगता है कि तेलंगाना में केसीआर के मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के विरोध से हिंदू वोटबैंक को उसके पक्ष में लामबंद हो सकता है.
आंध्र प्रदेश में टीडीपी का विकल्प बनने की जुगत में
लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश की 25 में 22 सीटें जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस और तीन सीटें टीडीपी जीतने में कामयाब रही है. इसी तरह विधानसभा चुनाव में कुल175 सीटों में से 151 वाईएसआर कांग्रेस, 23 टीडीपी और एक सीट अन्य को मिली है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों राष्ट्री पार्टियों को एक भी सीट नहीं मिली है.कांग्रेस का सारा राजनीतिक आधार वाईएसआर कांग्रेस में शिफ्ट हो गया है. ऐसे में बीजेपी आंध्र प्रदेश में टीडीपी की जगह लेने की जुगत में है.
बीजेपी की नजर टीडीपी के उन बड़े नेताओं पर है जो चंद्रबाबू नायडू से नाराज हैं. टीडीपी में कई नेता ऐसे हैं जो यह मानते हैं कि चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक गलतियों की वजह से ही टीडीपी की शर्मनाक हार का मुंह देखना पड़ा है. इसके अलावा कई नेता मानते हैं कि चंद्रबाबू ने एनडीए से बाहर आकर सबसे बड़ी गलती की. मौके की नजाकत को समझते हुए बीजेपी ने टीडीपी के मजबूत नेताओं को अपने साथ मिलाने में जुटी है. टीडीपी के महासचिव और पूर्व मंत्री ई पेद्दी रेड्डी बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं.
2024 पर बीजेपी की नजर
आंध्र प्रदेश में बीजेपी को मजबूत करने और 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक पार्टी को मुख्य मुकाबले में खड़े करने की जिम्मेदारी राम माधव और सह-प्रभारी सुनील देवधर के अलावा जेवीएल नरसिम्हा राव के कंधों पर है. इन तीन नेताओं की तिकड़ी बीजेपी के इस प्लान को जमीन पर उतारने में जुट गई है. बीजेपी की प्रदेश में प्राथमिकता कापू जाति पर पकड़ रखने वाले नेताओं पर है.
कापू समुदाय पर बीजेपी डाल रही डोरे
आंध्र प्रदेश में कापू जाति की आबादी करीब 18 फीसदी है और इनकी रेड्डी समुदाय से राजनीतिक प्रतिद्वंदिता जगजाहिर है. रेड्डी समुदाय एक समय कांग्रेस का मजबूत वोटबैंक माना जाता था जो अब वाईएसआर कांग्रेस के साथ जुड़ गया है. जबकि कापू समुदाय टीडीपी का मूल वोटबैंक है. इसलिए बीजेपी कापू समुदाय के नेताओं को अपने साथ मिलाने में जुटी है. लोकसभा चुनाव से ऐन पहले बीजेपी ने कांग्रेस छोड़ने वाले कापू जाति के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री कन्ना लक्ष्मी नारायण को पार्टी की आंध्र प्रदेश अध्यक्ष बनाया.
कुबूल अहमद