बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राधाकृष्णन ने तमिलों को बताया ‘कृतघ्न’

हिन्दी को लेकर गैर हिन्दी भाषी राज्यों, विशेष तौर पर दक्षिणी राज्यों में विरोध कोई नई बात नहीं है. यहां से पहले भी ये मांग उठती रही है कि हिन्दी को गैर हिन्दी भाषी राज्यों पर थोपा नहीं जाना चाहिए. इस मुद्दे पर पहले से बहस छिड़ी है, वहीं अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी राधाकृष्णन ने जो बयान दिया है उस पर तमिलनाडु से तीखी प्रतिक्रिया सामने आ सकती है.

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बीजेपी नेता पी राधानकृष्णन (फाइल फोटो) बीजेपी नेता पी राधानकृष्णन (फाइल फोटो)

शालिनी मारिया लोबो

  • चेन्नई,
  • 17 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

  • दक्षिण के राज्यों में हिन्दी भाषा का विरोध
  • बीजेपी नेता ने तमिलों को बताया ‘कृतघ्न’
  • हिन्दी दिवस समारोह से शुरु हुआ विवाद

हिन्दी को लेकर गैर हिन्दी भाषी राज्यों, विशेष तौर पर दक्षिणी राज्यों में विरोध कोई नई बात नहीं है. यहां से पहले भी ये मांग उठती रही है कि हिन्दी को गैर हिन्दी भाषी राज्यों पर थोपा नहीं जाना चाहिए. इस मुद्दे पर पहले से बहस छिड़ी है, वहीं अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी राधाकृष्णन ने जो बयान दिया है उस पर तमिलनाडु से तीखी प्रतिक्रिया सामने आ सकती है.

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राधाकृष्णन ने सोमवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए तमिलों को ‘कृतघ्न’ (ungrateful) बताया. बीजेपी नेता राधाकृष्णन ने कहा, “नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने घोषित किया कि तमिल दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है. एक कदम आगे जाते हुए उन्होंने ये भी कहा कि तमिल भाषा संस्कृत से भी पुरानी है, और हमें भाषा को लेकर कोई प्यार है तो साल भर मनाना चाहिए. तमिल कृतघ्न हैं.”  

राधाकृष्णन तमिलनाडु से बीजेपी के वरिष्ठ नेता है. 2014 लोकसभा चुनाव में वे तमिलनाडु से अकेले बीजेपी उम्मीदवार थे जो चुनाव जीतकर केंद्र में मंत्री बने थे.

राधाकृष्णन का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब तमिलनाडु में विपक्ष की ओर से हिन्दी को थोपे जाने के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है. तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में 20 सितंबर को व्यापक प्रदर्शन करने का एलान किया है.

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हिन्दी को लेकर ही अभिनेता से नेता बने कमल हासन भी केंद्र को चेतावनी दे चुके हैं. एमएनएम नेता कमल हासन ने कहा है कि अगर भाषा को लेकर खींचतान होती है तो जल्लीकट्टू से भी बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा.

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