नरसिम्हा राव की जगह अगर लालू-मुलायम या चंद्रशेखर होते PM तो 92 में क्या करते

अयोध्या के विवादित भूमि पर स्थ‍ित बाबरी मस्जिद के ढांचे को कार सेवकों ने 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था, तब देश में कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव थे. ऐसे में सवाल है कि अगर नरसिम्हा राव की जगह लालू यादव, मुलायम सिंह या फिर चंद्रशेखर अगर देश के पीएम होते तो क्या करते?

मुलायम सिंह यादव, पूर्व पीएम चंद्रशेखर और पूर्व पीएम नरसिम्हा राव
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 08 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 10:01 PM IST

  • अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी विध्वंस
  • लालू-मुलायम-चंद्रशेखर सरकार बर्खास्त के पक्ष में

अयोध्या के राममंदिर और बाबरी मस्जिद मामला 70 साल से कोर्ट में है. देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट जल्द ही अपना फैसला सुना सकती है. विवादित भूमि पर स्थ‍ित बाबरी मस्जिद के ढांचे को कारसेवकों ने 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था, तब देश में कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव थे. ऐसे में सवाल है कि अगर नरसिम्हा राव की जगह लालू यादव, मुलायम सिंह या फिर चंद्रशेखर अगर देश के पीएम होते तो क्या करते?

बाबरी विध्वंस के बाद इंडिया टुडे पत्रिका से मार्च के अंक में आरजेडी प्रमुख लालू यादव, सपा संरक्षक मुलायम सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सहित तमाम नेताओं से उस समय पत्रिका के फीचर एडिटर राज चेंगप्पा ने बातचीत की थी. चंद्रशेखर कहा था, 'ये बातें कोई गणित के समीकरण नहीं है. मैं संघ परिवार को साफ बता देता कि वे ढांचे के करीब नहीं जा सकते. मामले का फैसला करने के लिए मैं छह महीने की मोहलत मांगता.'

'उत्तर प्रदेश सरकार बर्खास्त कर देता'

चंद्रशेखर कहते हैं कि मामले की कार्रवाई पूरी होने तक किसी भी पक्ष को अखबारवालों तक जाने या इस मामले में हड़बड़ी मचाने की इजाजत नहीं देता. यदि मुझे सूचना मिलती की वे कानून का उल्लंघन करने जा रहे हैं तो मैं उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर देता. एक प्रधानमंत्री के पास इस तरह की सूचना होनी चाहिए अन्यथा वह देश कैसे चलाएगा.

बाबरी विध्वंस के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध और बीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी के सवाल पर चंद्रशेखर ने कहा कि ऐसी स्थिति में अपनी कार्रवाइयों का खाका आपके सामने स्पष्ट होना चाहिए. आपको यह संकेत देना होता है कि आप बल प्रयोग करने में हिचकिचाएंगे नहीं. मस्जिद ढहाने के बाद नरसिम्हा राव किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए. अन्यथा राष्ट्रपति शासन लागू करने में इतनी देर क्यों लगी.

उन्होंने कहा कि मैं मस्जिद ढहने की खबर सुनते ही ऐसा कर देता. मैं सुरक्षा बलों को गोली चलाने का आदेश देकर मूर्तियों की स्थापना नहीं होने देता. सभी संकटग्रस्त राज्यों में सेना को सतर्क कर तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश देता. मैं टेलीविजन पर अपनी कार्रवाइयों की कैफियत देता. अपना नजरिया लोगों तक पहुंचाता और शांति की अपील करता. मैं तीनों राज्यों की सरकारों को बर्खास्त नहीं करता, क्योंकि उन्हें तो वही करना पड़ता है जो केंद्र सरकार चाहती है.

दस दिन दे दो सब ठीक कर देता-मुलायम

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कहा था, 'पहली बात तो यह है कि मैं उत्तर प्रदेश सरकार को जुलाई में ही बर्खास्त कर देता, जब उन्होंने विवादित स्थल के निकट गैरकानूनी ढंग से चबुतरा बनवाया था. यादि ऐसा न कर पाता तो 25 नवंबर और 4 दिसंबर के बीच कभी भी उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर देता. सब जानते थे कि भाजपा वाले झूठे हैं, धोखेबाज हैं. मैं बाबरी मस्जिद को सुरक्षा बलों को सौंप देता.

आरएसएस पर प्रतिबंध के सवाल पर मुलायम सिंह ने कहा था, 'मैं सभी सांप्रदायिक संगठनों पर प्रतिबंध के पक्ष में हूं, लेकिन यह कैसा प्रतिबंध हुआ कि विहिप और आरएसएस नेता जब और जहां भी चाहें जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं. मुझे दस दिन दे दो सबको ठीक कर दूंगा.'

'चींटी को भी अयोध्या में घुसने नहीं देता'

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा था, 'उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की बात छोड़िए, मैं तो चींटी को भी अयोध्या में घुसने नहीं देता. मैं मंदिर और मस्जिद मुद्दे को इस तरह महत्वपूर्ण होने नहीं देता. इन पार्टियों (बीजेपी, विहिप और आरएसएस) का मंदिर या मस्जिद से कोई लेना-देना नहीं है. इनका मकसद तो बस बदमाशी करना और जनता को तंग करना है. लालू ने कहा था, 'सबसे पहले मैं दहशत के मारे अल्पसंख्यकों अपने संरक्षण की छाया में लेता. इसके बाद मुट्ठी भर दंगाइयों से निर्ममता से  निबटता और मुंबई इस तरह से नहीं जलती.

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