'घरवालों की मर्ज़ी के बगैर विवाह करने वाले जोड़ों को सुरक्षा मुहैया कराए पुलिस'

एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि किसी भी शादी का कहीं पर भी विरोध करने के लिए लोग एकत्रित हो या फिर शादी में रुकावट पैदा करें, या शादी करने वाले कपल का विवाह रोकने के लिए बाधा बने तो उनके खिलाफ पुलिस तुरंत करवाई करते हुए FIR दर्ज करे और शादी करने वाले कपल को सुरक्षा मुहैया कराए.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो ) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो )

अंकुर कुमार / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

घरवालों की मर्ज़ी और समाज की परम्परा के खिलाफ जाकर विवाह करने वाले जोड़ों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिए. मामला खाप पंचायत के तुगलकी फरमान से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि किसी भी शादी का कहीं पर भी विरोध करने के लिए लोग एकत्रित हों या फिर शादी में रुकावट पैदा करें, या शादी करने वाले कपल का विवाह रोकने के लिए बाधा बनें तो उनके खिलाफ पुलिस तुरंत करवाई करते हुए FIR दर्ज करे और शादी करने वाले कपल को सुरक्षा मुहैया कराए.

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सुझाव में ये भी कहा गया कि जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की ये ड्यूटी है कि वो इन कपल को सुरक्षा मुहैया कराए. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जिले के सीनियर पुलिस अधिकारी की एक कमिटी बनाये जो कपल की सुरक्षा का ध्यान रखेगी. कमिटी इस बात को देखेगी कि परिवार को कोई ख़तरा तो नहीं, अगर है तो वो सुरक्षा देगी.

एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि अगर कपल के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है तो ये जांच अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वो सम्बंधित लोगों पर कार्रवाई करें. साथ ही जो लोग इकठ्ठा हुए थे, उनकी भूमिका की भी जांच करे. अगर जांच के दौरान ये बात सामने आती है कि जो लोग इकठ्ठा हुए थे, उनकी भी इसमें भूमिका है तो जांच अधिकारी उनके खिलाफ भी कार्रवाई करे.

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एमिकस क्यूरी के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही तरीक़े से नहीं करता तो उसके खिलाफ सर्विस रूल के तहत कार्रवाई की जाए. साथ ही सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकारों को आदेश दे कि अगर कोई पुलिस अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसे सख्त सज़ा दी जाए. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को करेगा.

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