अंटार्कटिका में माउंट विंसन पर चढ़ेगा 14 साल का पर्वतारोही

आर्यन ने छह साल की उम्र से ही पर्वतारोहण शुरू कर दिया था. आर्यन के पिता सीडीआर बालाजी भारतीय नेवी में अधिकारी और पर्वतारोही हैं. आर्यन को पर्वतारोहण की प्रेरणा अपने पिता से मिली है.

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आर्यन बालाजी आर्यन बालाजी

प्रशस्त‍ि शांडिल्य

  • नई दिल्ली,
  • 27 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 12:05 AM IST

पर्वतारोहण एक मुश्किल खेल है और यह तब और भी मुश्किल हो जाता है जब एक चौदह साल का बच्चा खेलने वाला एक 14 साल का बच्चा हो. हालांकि, 14 वर्षीय आर्यन बालाजी का अंटार्कटिका में माउंट विंसन पर चढ़ना और सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बनकर विश्व रिकॉर्ड तोड़ना अभी बाकी है. उनकी यह यात्रा जनवरी, 2020 में शुरू होगी.

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आर्यन ने छह साल की उम्र से ही पर्वतारोहण शुरू कर दिया था. आर्यन के पिता सीडीआर बालाजी भारतीय नेवी में अधिकारी और पर्वतारोही हैं. आर्यन को पर्वतारोहण की प्रेरणा अपने पिता से मिली है.

14 साल की उम्र में ही आर्यन को कई अवॉर्ड और पुरस्कार मिल चुके हैं. आर्यन माउंट एवरेस्ट बेस कैंप, तंजानिया में माउंट किलीमाजरो, रूस में माउंट एल्ब्रस, नेपाल में तीन उच्चतम दर्रे और लेह में कांग यात्से के लिए सबसे कम उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा करते हैं.

अपनी इस यात्रा के बारे में बताते हुए वे कहते हैं कि कैसे उन्होंने चुनौतियों का सामना किया. उनके मुताबिक, 'पर्वतारोहण एक खूबसूरत खेल है. मेरे ख्याल से यह अकेला ऐसा खेल है जिसमें आप प्रकृति के साथ खेलते हैं. हालांकि, बहुत अधिक तापमान के साथ खुद को संभालना बहुत मुश्किल होता है लेकिन मैं अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा हूं. मैं अपने खानपान पर ध्यान दे रहा हूं और सबसे युवा पर्वतारोही के रूप में माउंट विंसन पर भारतीय ध्वज फहराने के लिए मुश्किल प्रशिक्षण ले रहा हूं.'

ट्रेनिंग पर और ज्यादा ध्यान दे रहा हूं...

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आर्यन के पिता सीडीआर बालाजी अपने बेटे को इस बड़ी चीज के लिए कमर कसता देख अभिभूत हैं और गर्व महसूस कर रहे हैं. वे कहते हैं, 'मैं हमेशा से ही देश के लिए कुछ करना चाहता था. मैं उसकी ट्रेनिंग पर और ज्यादा ध्यान दे रहा हूं. पर्वतारोहण में शारीरिक क्षमता के अलावा बहुत सी चीजें चाहिए होती हैं. मैं उसे प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं. अंटार्कटिका में वातावरण बेहद कठोर है इसलिए आर्यन को मानसिक, शारीरिक रूप से तैयार रहना होगा, साथ ही उसे मेडिकली फिट होना होगा. उसे कार्डियो और योग के साथ कई तरह की जिम ट्रेनिंग पर भी ध्यान देना होगा ताकि फेफड़े की क्षमता बढ़ जाए. मुझे वास्तव में इसे लेकर बहुत उम्मीद है कि मेरा देश उस पर गर्व करेगा.'

पढ़ाई भी बेहद अहम है...

लेकिन, पढ़ाई भी बेहद अहम है जो आर्यन की मां रिक्की बालाजी देखती हैं. उनका कहना है, "चूंकि आर्यन के पिता उसके वर्कआउट की देखभाल करते हैं, इसलिए मुझे उसकी पढ़ाई और उसके जुनून के बीच संतुलन को लेकर ध्यान देना होता है. वह सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करता है. उसके दोस्त भी बहुत मददगार हैं."

क्या आर्यन के पर्वतारोहण को लेकर उन्हें डर नहीं लगता, यह पूछे जाने पर वे कहती हैं, 'बेशक, एक मां होने के नाते अपने बच्चे को -45 डिग्री सेल्सियस तापमान में पर्वतारोहण करते देखना काफी कठिन है, क्योंकि यह खतरनाक भी है. लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि आर्यन अपने देश के लिए अपनी क्षमता को मजबूत कर लेगा.'

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