राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को राजस्थान के 21 जिलों में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के आम चुनाव चार चरणों में कराने के लिए कार्यक्रम घोषित कर दिया है. पहले चरण में 23 नवंबर, दूसरे चरण में 27 नवंबर, तीसरे चरण में 1 दिसंबर और चौथे चरण में 5 दिसंबर को मतदान होगा.
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता के प्रावधान तुरंत प्रभावी हो गए हैं, जो चुनाव प्रक्रिया समाप्ति तक लागू रहेंगे.
चुनाव आयुक्त पीएस मेहरा ने बताया कि राज्य सरकार ने इस साल जून और अगस्त में अधिसूचनाएं जारी कर 18 नगरपालिकाओं का नवसृजन किया था. इन नगरपालिकाओं के सृजन से 48 ग्राम पंचायत पूर्ण अथवा आंशिक रूप से प्रभावित हुई हैं. इन पंचायतों के पूर्ण अथवा आंशिक क्षेत्र नगरपालिका में शामिल होने से शेष रहे ग्रामों या क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के बाद संबंधित जिला परिषद एवं पंचायत समिति निर्वाचन क्षेत्र एवं कतिपय स्थानों पर इनके आरक्षण में भी परिवर्तन होना संभावित है.
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उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट में विचाराधीन याचिका और 4 अन्य समान प्रकृति की याचिकाओं में कोर्ट द्वारा नवीन नगरपालिकाओं के गठन के लिए स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचनाओं पर अंतरिम स्थगन प्रदान कर दिए जाने से नवगठित नगरपालिकाओं से प्रभावित पंचायतीराज संस्थाओं की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है. ऐसे में नवसृजित 18 नगरपालिकाओं से प्रभावित उक्तानुसार 12 जिलों में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के आम चुनाव कराना संभव नहीं है.
21 जिलों में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता
चुनाव आयुक्त पीएस मेहरा ने बताया कि राज्य के अजमेर, चूरू, नागौर, बांसवाडा, डूंगरपुर, पाली, बाड़मेर, हनुमानगढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, जैसलमेर, राजसमंद, बीकानेर, जालौर, सीकर, बूंदी, झालावाड़, टोंक, चित्तौड़गढ़, झुंझुनूं और उदयपुर जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चरणों में करवाए जाएंगे. उन्होंने बताया कि इन 21 जिलों में 2 करोड़ 41 लाख, 87 हजार, 946 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. इन 21 जिलों में 636 जिला परिषद सदस्य, 4371 पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव कराए जाएंगे.
नामांकन प्रक्रिया 4 नवंबर को अधिसूचना जारी होते ही शुरू हो जाएगी. मेहरा ने बताया कि चारों चरणों के लिए संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा 4 नवंबर को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी. इसी के साथ नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी. उन्होंने बताया कि नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि एवं समय 9 नवंबर दोपहर 3 बजे तक रहेगी. नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 10 नवंबर सुबह 11 बजे से होगी, जबकि 11 नवंबर दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे.
नाम वापसी के साथ ही चुनाव प्रतीकों का आवंटन एवं चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा. पहले चरण के लिए 23 नवंबर, दूसरे चरण के लिए 27 नवंबर, तीसरे चरण के लिए 1 दिसंबर और चौथे चरण के लिए 5 दिसंबर को सुबह 7.30 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान करवाया जाएगा. मतगणना 8 दिसंबर को सुबह 9 बजे से सभी जिला मुख्यालयों पर होगी. इसी तरह प्रधान या प्रमुख का चुनाव 10 दिसंबर और उप प्रधान या उप प्रमुख 11 दिसंबर को चुनाव होगा. शाम 5 बजे या मतदान की समाप्ति के साथ ही मतगणना प्रारंभ हो जाएगी.
मतदान बूथ पर अब 900 मतदाता
मेहरा ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए आयोग द्वारा अब प्रत्येक मतदान बूथ पर मतदाताओं की संख्या भी कम कर 900 कर दी गई है. पूर्व में एक मतदान बूथ पर 1,100 मतदाताओं की सीमा निर्धारित थी. मतदाताओं की संख्या के अनुसार 21 जिलों में 33,611 मतदान बूथ स्थापित किए जाएंगे. इसके साथ ही पंचायत और नगर निगम चुनाव की तरह ही यहां भी मतदान के समय में बढ़ोतरी कर मतदान का समय सुबह 7.30 बजे से शाम 5.00 बजे तय किया गया है, ताकि मतदाता सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए मतदान कर सके.
अभ्यर्थियों के लिए तय की चुनाव खर्च सीमा
चुनाव आयुक्त ने बताया कि आयोग ने जिला परिषद सदस्य के चुनाव लड़ रहे अभ्यर्थियों के लिए 1,50,000 और पंचायत समिति सदस्य के लिए 75,000 रुपये खर्च सीमा निर्धारित की है. उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों या राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव प्रचार के लिए किए जाने वाले खर्च की निगरानी के लिए संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा रिटर्निंग अधिकारी के स्तर पर एक प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा, जो अभ्यर्थियों या राजनैतिक दलों द्वारा चुनाव प्रचार के लिए किए जाने वाले खर्च की सतत् निगरानी रखेगा.
चुनाव की पूरी प्रक्रिया कोरोना गाइडलाइंस के तहत कराए जाएंगे. केंद्र, राज्य सरकार, चिकित्सा विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार चुनाव करवाए जाएंगे.
शरत कुमार