राजस्थान मानवाधिकार आयोग की मांग, लिव-इन रिलेशनशिप पर लगे रोक

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि लिव-इन रिलेशनशिप पर तुरंत रोक लगाई जाए और इसे रोकने के लिए सरकार उपाय करे.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

शरत कुमार

  • जयपुर,
  • 04 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 9:35 PM IST

  • राजस्थान मानवाधिकार आयोग का तुगलकी फरमान
  • लिव-इन-रिलेशनशिप पर लगाई जाए रोक
  • आयोग ने राज्य सरकार से की अपील

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर तुगलकी फरमान जारी किया है. राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि लिव-इन रिलेशनशिप पर तुरंत रोक लगाई जाए और इसे रोकने के लिए सरकार उपाय करे. आयोग ने कहा है कि इससे समाज में गंदगी फैल रही है.

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राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने आज एक चौंकाने वाला आदेश निकाला है, जिसमें सरकार को निर्देश दिया है कि लिव इन रिलेशनशिप पर रोक लगाई जाए क्योंकि यह समाज को विखंडित कर रहा है.

राज्य मानवाधिकार आयोग में कहा है कि महिला सुरक्षा अधिनियम 2005 के अंदर महिलाओं को ज्यादा सुरक्षित करने के उपायों पर विचार करते हुए मानवाधिकार आयोग ने पाया है कि इस अधिनियम में सुधार की जरूरत है. लिव-इन-रिलेशनशिप जैसे संबंधों को रोकने की जरूरत है.

राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को कहा है कि लिव इन रिलेशनशिप रोकने के लिए राज्य सरकार कानून बनाएं और इस तरह के कानून को बनाने के लिए केंद्र सरकार को भी चिट्ठी लिखे. आयोग के अनुसार समाज में शादी की प्रकृति को लेकर साफ साफ निर्देश होने चाहिए जिससे महिला सम्मान पूर्वक जीवन जी सकें.

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राज्य मानवाधिकार आयोग ने आगे कहा है कि अगर इस तरह के लिव-इन-रिलेशनशिप के संबंध राज्य में है तो उसे जल्द से जल्द पंजीकृत करवाए जाएं.

मानवाधिकार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए 27 पेज के अपने निर्देश में कहा है कि लिव-इन-रिलेशनशिप को सर्वोच्च न्यायालय ने भी सही नहीं माना है.

आयोग की दलील है कि बिना शादी की कोई महिला किसी के साथ रहती है तो उसे रखैल कहा जाता है और रखैल कभी भी समाज में वह दर्जा नहीं पा सकती है जो एक शादीशुदा औरत पाती है. इसलिए किसी औरत का रखैल बनना महिला के स्वाभिमान और सुरक्षा पर हमला है. इसे रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए. रखैल शब्द बेहद घृणित और चरित्रहीन है.

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