कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की बढ़ती तादाद के बीच सरकार ने देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी है. रेल, बस और विमान सेवा पूरी तरह ठप है. इसके बावजूद दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य शहरों से मजदूर बड़ी संख्या में अपने गांव, अपने घर लौट रहे हैं. राजस्थान के धौलपुर में भी सैकड़ों ऐसे मजदूर वापस गांव लौटे हैं, जो अन्य शहरों में रहकर रोजी-रोजगार करते हैं.
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सैकड़ों की तादाद में घर लौटे इन मजदूरों की हालत 'आसमान से लटके, खजूर पर अटके' वाली हो गई है. तमाम परेशानियों से दो-चार होते हुए यह मजदूर जैसे-तैसे जौधपुर से पैदल ही चलकर धौलपुर अपने गांव तो पहुंच गए, लेकिन ग्रामीणों, कॉलोनीवासियों और तो और परिजनों ने भी इन्हें प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी. परिजनों ने इन मजदूरों को उल्टे पांव अस्पताल भेज दिया. वह भी सख्त हिदायत के साथ कि जब तक उन्हें यह क्लीनचिट नहीं मिल जाती कि उनमें कोरोना वायरस के लक्षण नहीं हैं, तब तक घर तो क्या गांव-कॉलोनी में भी प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.
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हैदराबाद से आए मजदूर मुकेश कुमार सफर की परेशानियां बताते हुए कहते हैं कि रास्ते में थोड़ी यात्रा ट्रक से, लेकिन अधिकतर पैदल ही पूरी की. चार-पांच दिन हो गए. भूखे-प्यासे ही हैं. उन्होंने कहा कि गांव पहुंचे तो घुसने नहीं दिया गया और अस्पताल आए तो जांच नहीं की जा रही है. भूख से बेहाल हैं. मुकेश ने लॉकडाउन के बावजूद घर के लिए पैदल ही चल देने के संबंध में कहा कि वहां अब खाने तक के पैसे नहीं थे.
चाय पीने को पैसे नहीं और पर्चा 20 का
हैदराबाद से ही लौटे और अस्पताल के बाहर स्क्रीनिंग के लिए कतार में खड़े मजदूर दीवान सिंह ने कहा कि हमारे पास चाय पीने को भी पैसे नहीं हैं और 20 रुपये का पर्चा कटाने के लिए कहा जा रहा है. कुछ ऐसी ही व्यथा रमेश की भी है. जोधपुर से लौटे मजदूर ओमेंद्र सिंह सुबह से कॉलोनी के बाहर बैठे थे. उन्होंने बताया कि कॉलोनी वाले अंदर जाने नहीं दे रहे और हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने के बावजूद जांच के लिए अब तक कोई आया नहीं. जाने कब तक ऐसे ही खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ेगा. धौलपुर की एक कॉलोनी के बाहर बंद दुकान में बैठे दो मजदूरों ने कंट्रोल रूम को भी सूचना दी, लेकिन घंटों तक कोई लेने नहीं पहुंचा.
जिलाधिकारी के हस्तक्षेप पर सक्रिय हुआ स्वास्थ्य महकमा
अब बेचारे मजदूर स्क्रीनिंग के लिए धौलपुर जिला अस्पताल के बाहर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं. ऐसे मजदूरों की संख्या लगभग पांच सौ बताई जा रही है. आर्थिक तंगी झेल रहे गांव-घर का रुख करने वाले मजदूरों मुसीबत और बढ़ गई है. अस्पताल में 12 घंटे से अधिक समय से मजदूरों की लंबी कतार लगी होने की बात जिलाधिकारी तक पहुंची, तो जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद अब स्वास्थ्य महकमे के लोग जांच शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
इस संबंध में जिलाधिकारी राकेश कुमार जायसवाल ने कहा कि कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग के लिए अस्पताल पहुंचे लोगों को बगैर किसी शुल्क के पर्ची और दवाएं देने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने मजदूरों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सभी तरह की व्यवस्थाएं की जाएंगी. वहीं, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर समरवीर सिंह ने कहा कि अस्पताल में लगभग पांच सौ लोग विशाखापत्तनम, पुणे और अन्य शहरों से आए थे. उन्होंने दावा किया कि जिलाधिकारी के आदेश पर सभी की बगैर किसी शुल्क के जांच की गई और दवा दी गई.
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पुलिस की मदद लेकर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखकर मजदूरों की जांच कराई जा रही है. स्वस्थ मजदूरों को क्लीनचिट देकर भेज दिया जाएगा, जबकि संदिग्धों के सैंपल आगे की जांच के लिए भेजकर उन्हें आइसोलेशन में रखा जाएगा.
उमेश मिश्रा