पंजाब में माहौल खराब करने की कोशिशों में जुटा खालिस्तानी संगठन 'वारिस पंजाब दे' का मुखिया अमृतपाल सिंह बीते काफी समय से फरार चल रहा है. पंजाब पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है. अमृतपाल और उसके साथियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस ने अब तक उसके नौ गुर्गों को गिरफ्तार किया है, जिसमें उसका खास सहयोगी पप्पलप्रीत सिंह भी शामिल है. जिन नौ गुर्गों को पुलिस अरेस्ट कर चुकी है, उनमें शामिल हैं-
1-पप्पलप्रीत सिंह
2- दलजीत सिंह कलसी
3- भगवंत सिंह उर्फ बाजेके
4- गुरमीत सिंह बुक्कनवाल
5- बसंत सिंह दौलतपुरा
6- हरजीत सिंह
7- वरिंदर सिंह उर्फ फौजी
8- वरिंदर सिंह
9- गुरिंदर पाल सिंह
ये सभी फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं.
पप्पलप्रीत सिंह
पुलिस की गिरफ्त में सबसे नया नाम जुड़ा है अमृतपाल का दाहिना हाथ और मीडिया सलाहकार पप्पलप्रीत सिंह का, जिसकी पृष्ठभूमि भी अन्य सहयोगियों की तरह आपराधिक है. पप्पलप्रीत सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में अजनाला थाने पर हमला, अपहरण और लोगों को धमकी देना शामिल है. वह दीप सिद्धू का भी करीबी सहयोगी रहा था जिसकी 2022 में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. आईएसआई के साथ कथित संबंधों के चलते पप्पलप्रीत के खिलाफ 2015 में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था. सूत्रों का कहना है कि पप्पलप्रीत सिंह सहित अमृतपाल के सहयोगियों को आईएसआई और विदेशी खालिस्तानी हमदर्दों से फंडिंग मिली थी. अमृतपाल सिंह को मीडिया में भिंडरावाले 2.0 के रूप में पेश करने के पीछे भी पप्पलप्रीत का ही दिमाग था.
ISI से भी संबंध
पप्पलप्रीत की गिरफ्तारी को न सिर्फ इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि उससे पूछताछ कर अमृतपाल की गिरफ्तारी हो सकती है, बल्कि खालिस्तानी स्लीपर सेल का भंडाफोड़ भी हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि पप्पलप्रीत को स्लीपर सेल और खालिस्तानी हमदर्द डेरों के बारे में जानकारी थी. पप्पलप्रीत ने मैट्रिक की परीक्षा कैथू नंगल स्कूल से पास की है. 2022 में अमृतपाल सिंह के साथ हाथ मिलाने से पहले उसने एक अन्य खालिस्तानी समर्थक सिमरनजीत सिंह मान के साथ काम किया था.
वह अमृतसर के मोरारी गांव का रहने वाला है. उसने 2015 में सिख यूथ फ्रंट नामक एक कट्टरपंथी युवा संगठन की स्थापना की थी. इसके बाद पप्पलप्रीत 2016 में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) में संगठनात्मक सचिव बन गया. पप्पलप्रीत सिंह अमृतपाल का ऐसा नौवां समर्थक हैं जिसे असम के डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में भेज दिया गया है. उसे 23 दिन तक पीछा करने के बाद 10 अप्रैल को अमृतसर के काथू नांगल इलाके से गिरफ्तार किया गया.
दिलजीत कलसी
पप्पलप्रीत सिंह ही नहीं बल्कि अमृतपाल के फाइनेंसर दिलजीत कलसी के भी आईएसआई से संबंध हैं. दिलजीत सिंह कलसी उर्फ सरबजीत सिंह कलसी को 19 मार्च 2013 को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया था. वह स्टर्लिंग इंडिया एंड नामक एक मल्टीलेवल मार्केटिंग फर्म भी चलाता था. पांच फर्मों में से उसने तीन को बंद कर दिया जबकि दो अभी भी काम कर रही थीं. कुछ कंपनियां कथित तौर पर पोंजी स्कीम का कारोबार करती हैं. उसने कथित तौर पर पिछले दो वर्षों के दौरान 35 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी फंडिंग प्राप्त की और कथित तौर पर पाकिस्तान में एक दर्जन से अधिक बार कॉल किया.
भगवंत सिंह
खुद को प्रधानमंत्री (प्रधानमंत्री बाजेके) कहने वाला भगवंत सिंह भी अमृतपाल के करीबी सहयोगियों में रहा है और एक हिस्ट्रीशीटर भी है. वह मोगा के बाजेके गांव का रहने वाला है और स्कूल छोड़ चुका है. अधिकारियों द्वारा उसके हैंडल को ब्लॉक किए जाने तक वह सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय था उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया. भगवंत पर पहले से ही मोगा में हत्या के प्रयास, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट (कोविड 19 मानदंड), लोगों को धमकाने और भूमि विवाद सहित आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं. उसके पास शस्त्र लाइसेंस नहीं था, लेकिन वह खुलेआम बंदूकों का प्रदर्शन करता था.
हरजीत सिंह
अमृतपाल का एनआरआई चाचा हरजीत सिंह लोगों को धमकाता था. यूके निवासी चाचा हरजीत सिंह और उसेके ड्राइवर हरप्रीत सिंह ने 19 मार्च को जालंधर के शाहकोट में पंजाब पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. इसके अलावा, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. हरजीत पर एनएसए के अलावा,आईपीसी की धारा 449, 342, 506, और 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत केस दर्ज किया गया है. उधोवाल, जालंधर गांव के मुखिया मनप्रीत सिंह ने आरोप लगाया था कि हरजीत उनके घर में घुसा और आपराधिक मंशा तथा बंदूक की नोक पर गलत तरीके से बंधक बनाया.
गुरिंदर पाल
अमृतपाल का सोशल मीडिया हैंडलर गुरिंदर पाल उर्फ गुर औजला भी जेल में बंद है. उस पर भी एनएसए लगाया गया है.
वरिंदर सिंह उर्फ फौजी
अमृतपाल के दो अंगरक्षक सेना के पूर्व कांस्टेबल हैं. वरिंदर सिंह उर्फ फौजी को 27 मार्च को तरनतारन गांव से गिरफ्तार किया गया था. वह एक पूर्व सैन्य कांस्टेबल रहा है. वह उन 10 अंगरक्षकों में था जिन्होंने अमृतपाल सिंह की सुरक्षा में तैनात था. उसने अपना शस्त्र लाइसेंस जम्मू कश्मीर से प्राप्त किया था जिसे अजनाला की घटना के बाद रद्द कर दिया गया. वरिंदर सिंह उर्फ फौजी अमृतपाल के बॉडीगार्ड के तौर पर काम करता था.
गुरमीत सिंह भुक्कनवाला
एक अन्य सहयोगी गुरमीत सिंह भुक्कनवाला (35) मोगा के भुक्कनवाला गांव का रहने वाला है. वह एक फर्नीचर की दुकान का मालिक है और दीप सिद्धू का पूर्व समर्थक है. उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन वह अजनाला थाने पर हुए हमले में शामिल था. गुरमीत सिंह भुक्कनवाला वारिस पंजाब दे का मोगा इंचार्ज था और उसने पहले दीप सिद्धू के साथ काम किया था. माना जाता है कि उसने स्थानीय नेटवर्क बनाने में अमृतपाल की मदद की थी.
बसंत सिंह दौलतपुरा
अमृतपाल के खजांची के तार भी आईएसआई से जुड़े हैं. बसंत सिंह दौलतपुरा (28) मोगा के रहने वाला है और पहले दुबई में दो साल तक मजदूरी करता था और किसान आंदोलन के दौरान दीप सिद्धू का समर्थक बन गया. वह जलूपुर खेड़ा में अमृतपाल द्वारा शुरू किए गए नशामुक्ति केंद्र की देखरेख कर रहा था. बंसत का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन अजनाला थाने पर हमले में शामिल था. इसके अलावा वह अमृतपाल का बॉडीगार्ड भी था. उसने अमृतपाल सिंह के खजांची के रूप में भी काम किया और कथित तौर पर पाकिस्तान के आईएसआई से पैसा प्राप्त किया.
अमृतपाल (30 साल) 'वारिस पंजाब दे' (Waris Punjab De) का प्रमुख है. पंजाब में पिछले कुछ दिन से उसे जरनैल सिंह भिंडरावाले-2.0 तक कहा जा रहा है. भिंडरावाले ने 1980 के दशक में सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग उठाई थी और पूरे पंजाब में कोहराम मचा दिया था. ठीक उसी तरह अमृतपाल सिंह सिर पर तुलनात्मक रूप से भारी पगड़ी बांधता है और भीड़ को उकसाने वाले बयान देकर भीड़ को भड़काता रहा है.
अमृतपाल सिंह जो संगठन 'वारिस पंजाब दे' संचालित करता है, वो एक्टर-एक्टिविस्ट दीप सिद्धू ने बनाया था. बाद में 15 फरवरी 2022 को दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत हो गई थी. दीप सिद्धू के निधन के बाद इस संगठन की कमान कुछ महीने पहले ही दुबई से लौटे अमृतपाल सिंह ने संभाली और वो इसका प्रमुख बन गया. उसने किसान आंदोलन में भी रुचि दिखाई थी. दीप सिद्धू की मौत के बाद अमृतपाल सिंह ने 'वारिस पंजाब दे' वेबसाइट बनाई और लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया.
मनजीत सहगल