नए कृषि कानूनों का विरोध अब पंजाब के किसानों पर खुद ही पड़ रहा भारी!

बिजली की आपूर्ति गड़बड़ाने से अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को प्रतिदिन दूसरे माध्यमों से बिजली खरीदने पर 5 से ₹10 करोड़ खर्च करने पड़ रहे हैं. बिजली की कमी के चलते पंजाब में कई जगहों पर पावर कट लोगों की परेशानी का सबब बन रहे हैं. 

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कृषि कानून का विरोध करते पंजाब के किसान (फाइल फोटो) कृषि कानून का विरोध करते पंजाब के किसान (फाइल फोटो)

मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 02 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:36 PM IST
  • माल गाड़ियों की आवाजाही रोकने से हो रही परेशानी
  • कोयले की कमी के चलते चार थर्मल प्लांट बंद
  • पंजाब में कई जगहों पर पावर कट से लोग परेशान

रेलवे ट्रैक बाधित होने के कारण पंजाब में माल गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई है जिससे कोयले ,पेट्रोलियम पदार्थों यूरिया, फॉस्फेट और बारदाने (जूट की बोरियां) की आपूर्ति गड़बड़ा गई है.

कोयले की कमी के चलते पंजाब के चार थर्मल प्लांट बंद कर दिए गए हैं जिससे बिजली उत्पादन 1500 से 1700 मेगावाट तक गिर गया है.

बिजली की आपूर्ति गड़बड़ाने से अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को प्रतिदिन दूसरे माध्यमों से बिजली खरीदने पर 5 से ₹10 करोड़ खर्च करने पड़ रहे हैं. बिजली की कमी के चलते पंजाब में कई जगहों पर पावर कट लोगों की परेशानी का सबब बन रहे हैं. 

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हालांकि बिजली विभाग के अधिकारी लंबे पावर कट से इंकार कर रहे हैं  लेकिन किसान नेता पावर कट की पुष्टि कर रहे हैं.

माल गाड़ियों की आवाजाही रुक जाने से अब राज्य में बारदाने (जूट की बोरियों) का संकट हो गया है. इस वक्त राज्य में धान की फसल की खरीद जोरों पर है लेकिन बारदाने की कमी के चलते कई जगहों पर खरीद प्रभावित हो रही है.   

बंगाल से नहीं हो पा रही जूट की बोरियों की आपूर्ति 

राज्य में बारदाने की कुल खपत का 30 फ़ीसदी हिस्सा सरकार और 70 फ़ीसदी राइस शेलर मालिक उपलब्ध करवाते हैं. पंजाब से अधिकतर जूट की बोरियां पश्चिम बंगाल से आती हैं. लेकिन मालगाड़ियां रद्द हो जाने से पश्चिमी बंगाल से अब आपूर्ति ठप है. इस कमी के चलते न केवल धान बल्कि गोदामों में बंद पड़ी गेहूं का स्टॉक भी दूसरी जगह पर भेजने में दिक्कत आ रही है. 

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रूपनगर के 23 वर्षीय किसान जतिंदर सिंह चंडीगढ़ की अनाज मंडी में अपनी धान की फसल लेकर पहुंचे हैं. वो कई दिन से मंडी में अपनी फसल उठने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बारदाने की कमी के चलते उनको दिक्कत आ रही है. 

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खाद की कमी से प्रभावित होगी रबी फसलों की बुवाई  

पंजाब में रबी की फसलों के लिए किसान बहुतायत में यूरिया और फास्फेट का इस्तेमाल करते हैं. राज्य में हर साल रबी की फसलों को बोने के लिए 14.50 लाख टन यूरिया की खपत होती है. इस साल माल गाड़ियों की आवाजाही रुक जाने से यूरिया की आपूर्ति नहीं हो पाई है. 

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य में इस वक्त सिर्फ 75,000 टन ही यूरिया का स्टॉक बचा है. पिछले महीने चार लाख टन यूरिया पंजाब में पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन पहुंचा सिर्फ एक लाख टन ही. 

यूरिया और फास्फेट की कमी के चलते पंजाब में गेहूं सहित रबी की दूसरी फसलों की बुआई में देरी हो सकती है. 

मच्छीवाड़ा क्षेत्र के किसान सुखविंदर सिंह (उम्र 30 साल) ने आज तक को बताया कि मालगाड़ियों के रुक जाने से उनको खाद और फास्फेट खरीदने में दिक्कत आ रही है. किसानों के पास फसल देरी से बोने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. 

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रेलवे ट्रैक पर डटे हैं आंदोलनकारी 
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और दूसरे नेताओं की अपील के बावजूद भी कई किसान आंदोलनकारी अभी भी रेलवे ट्रैक और रेलवे स्टेशनों पर जमे हुए हैं. एक अनुमान के मुताबिक पंजाब के चार प्रमुख रेल मार्गों सहित रेलवे की लगभग 20 संपत्तियों पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा है. 

हालांकि कुछ किसान संगठनों ने रेलवे ट्रैक खाली करने का फैसला कर लिया था लेकिन केंद्र सरकार के साथ कृषि कानूनों को लेकर होने वाली बैठक बेनतीजा रहने के बाद वह फिर से रेलवे ट्रैक पर आ गए. 

लगभग 200 कृषि यूनियंस ने नए कृषि सुधारों के खिलाफ 5 नवंबर को राष्ट्रव्यापी चक्का जाम करने की धमकी दी है. उसके बाद ये आंदोलनकारी दिल्ली भी कूच कर सकते हैं. 

आंदोलनकारी किसान संगठन केंद्र से तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सूत्रों के मुताबिक भाजपा पार्टी हाईकमान ने अपनी पंजाब इकाई के नेताओं को साफ कर दिया है कि सरकार किसी भी सूरत में कृषि कानून रद्द नहीं करेगी. 

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