RSS को लेकर अकाल तख्त नेता का बयान दुर्भाग्यपूर्ण और तथ्यों से परेः बीजेपी

सिख धर्म की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार (नेता) ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग करके राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है. इस धार्मिक नेता के विवादित बयान के बाद बीजेपी ने नाराजगी जाहिर करते हुए हरप्रीत के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और तथ्यों से परे बताया.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 16 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 12:00 AM IST

  • बीजेपी की अकाल तख्त के नेता को तथ्यों की जानकारी लेने की सलाह
  • बीजेपी ने कहा, देश को तोड़ता नहीं जोड़ता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
  • अकाली दल ने अकाल तख्त के जत्थेदार के बयान से किनारा किया
  • अकाल तख्त के जत्थेदार ने फिर कहा- आरएसएस पर लगे प्रतिबंध

सिख धर्म की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार (नेता) ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध की मांग करके राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है. इस धार्मिक नेता के विवादित बयान के बाद कई हिंदू संगठनों और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए हरप्रीत सिंह के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और तथ्यों से परे बताया है.

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनीत जोशी ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह के बयान पर आपत्ति जताई और इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. उन्होंने कहा कि अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि आरएसएस पर बैन लगना चाहिए. यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और तथ्यों से परे बयान है.

'आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन'

आजतक से खास बातचीत में विनीत जोशी ने आगे कहा कि आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है. संघ देश के लिए मर-मिटने की बात करता है. देश को तोड़ने की बात नहीं करता. उनका जत्थेदार साहब से निवेदन है कि वह एक बार तथ्यों की जांच कर लें फिर इस मसले पर बात करें.

आरएसएस को लेकर बयानबाजी करने वाले कट्टरवादी खालिस्तान समर्थक नेताओं को चेतावनी देते हुए विनीत जोशी ने कहा है कि देश को पंजाब से नहीं बल्कि अलगाववादियों से खतरा है.

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उन्होंने कहा, 'कट्टरवादी सिख संगठनों से मैं निवेदन करूंगा कि आरएसएस से उनको कोई खतरा नहीं है. पंजाब के भीतर और बहुत सारे मुद्दे हैं जिनकी उनको चिंता करनी चाहिए.'

अकाली दल के प्रवक्ता की चुप्पी

इस विवाद को लेकर जब वरिष्ठ अकाली दल नेता और पार्टी प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अकाल तख्त सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है और वह इसके जत्थेदार नेता के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. दूसरे अर्थों में अकाली दल ने अकाल तख्त के नेता के विवादित बयान से किनारा कर लिया है.

हालांकि अकाल तख्त के नेता ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मंगलवार को एक बार फिर अपना विवादित बयान दोहराया और कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि वह भारत को हिंदू राष्ट्र बताकर दूसरे समुदायों में असंतोष पैदा कर रहा है.

संघ के सिख संगत से 36 का आंकड़ा

दरअसल, कट्टरवादी सिख संगठनों और अकाल तख्त में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सिख इकाई 'राष्ट्रीय सिख संगत' के गठन से लेकर आज तक 36 का आंकड़ा रहा है. 'राष्ट्रीय सिख संगत' हिंदू और सिखों के बीच भाईचारे के भाव को बनाए रखने के लिए स्थापित किया गया था.

'राष्ट्रीय सिख संगत' पंजाब के अलावा राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में काम कर रहा है.

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खालिस्तानी संगठन 'राष्ट्रीय सिख संगतन से खार खाए हुए हैं. साल 2004 में अकाल तख्त ने 'राष्ट्रीय सिख संगत' को सिख विरोधी करार देते हुए सिखों को 'राष्ट्रीय सिख संगत' से कोई ताल्लुक न रखने की हिदायत दी थी.

साल 2009 में बब्बर खालसा के एक आतंकवादी ने 'राष्ट्रीय सिख संगत' के तत्कालीन अध्यक्ष रूलदा सिंह की पटियाला में हत्या कर दी थी. उसके बाद साल 2014 में गुरु चरण सिंह गिल को 'राष्ट्रीय सिख संगत' का अध्यक्ष बनाया गया था.

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