पंजाब: क्या BJP से नाराज चल रहे हैं सुनील जाखड़? विजय रूपाणी बोले- उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया

पंजाब में होने जा रहे पंचायत चुनाव और उपचुनाव के लिए बीजेपी ने एक अहम बैठक का आयोजन किया, जिसमें सुनील जाखड़ मौजूद नहीं थे. उनकी अनुपस्थिति ने भी अब उन संभावनाओं को जोर दे दिया है, जिसमें जाखड़ के नाराज होने की बात कही जा रही थी.

Advertisement
Sunil Jakhar (File Photo) Sunil Jakhar (File Photo)

असीम बस्सी

  • चंडीगढ़,
  • 30 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST

क्या पंजाब बीजेपी (BJP) के चीफ सुनील जाखड़ इन दिनों पार्टी से नाराज चल रहे हैं. ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल ही में यह खबर सामने आई की सुनील जाखड़ ने इस्तीफे की पेशकश की है. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उन्होंने इस्तीफा देने की पेशकश की, लेकिन आधिकारिक कागजी कार्रवाई नहीं की गई.

इस बीच अब पंजाब में होने जा रहे पंचायत चुनाव और उपचुनाव के लिए बीजेपी ने एक अहम बैठक का आयोजन किया, जिसमें सुनील जाखड़ मौजूद नहीं थे. उनकी अनुपस्थिति ने भी अब उन संभावनाओं को जोर दे दिया है, जिसमें जाखड़ के नाराज होने की बात कही जा रही थी.  

Advertisement

'पार्टी के अंदर कोई समस्या नहीं'

हालांकि, पंजाब के बीजेपी प्रभारी विजय रूपाणी ने जाखड़ के इस्तीफे की खबरों को गलत बताया है. उन्होंने कहा है कि जाखड़ ने इस्तीफा नहीं दिया है. वह निजी काम में व्यस्त हैं और इसलिए मीटिंग में भी मौजूद नहीं रहे. रूपाणी ने आगे कहा,'पार्टी के अंदर कोई समस्या नहीं है, बस जाखड़ व्यस्त हैं. पिछले कुछ दिनों से जाखड़ पार्टी के मामलों से दूर हैं.'

बता दें कि सूत्रों के मुताबिक 27 सितंबर को पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इस्तीफे की पेशकश की. वहीं बीजेपी महासचिव अनिल सरीन ने आजतक से कहा था,'सुनील जाखड़ ने इस्तीफा नहीं दिया है, हालांकि ऐसी अफवाहें हैं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. वह अभी भी पार्टी के साथ हैं और हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं.'

Advertisement

क्या ये है सुनील जाखड़ की कमजोरी?

जानकारों की मानें तो सुनील जाखड़ भले ही हिंदू और जाट नेता हों, लेकिन पंजाब की राजनीति में पगड़ी न पहनना उन्हें महंगा पड़ गया. उन्हें कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसने उन्हें सिख न होने के कारण मुख्यमंत्री पद के लिए नहीं चुना. वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने खुलेआम कहा था कि जाखड़ पंजाब के मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि वे सिख नहीं हैं.

दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज करके उनके कनिष्ठों को शीर्ष पद के लिए चुना.हालांकि भाजपा ने उन्हें राज्य पार्टी अध्यक्ष बनाया, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हें नहीं चुना, जैसा कि चुनाव हार चुके रवनीत सिंह बिट्टू के मामले में हुआ. इससे यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी की प्राथमिकताएं कहां हैं. दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी ने अपनी राज्य इकाई में हिंदुओं से ज्यादा सिख कांग्रेस नेताओं को शामिल किया. एक बार कहा गया था कि पंजाब में बीजेपी पार्टी यूनिट कांग्रेस की बी-टीम है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement