Haryana Panchayat Election 2022: सबसे कम उम्र की सरपंच बनीं 21 साल की अंजू, परिवार का नहीं राजनीति से संबंध

हरियाणा पंचायत इलेक्शन में 21 साल की लड़की अपने गांव की सरपंच चुनी गई. अंजू तंवर मेडिकल की स्टूडेंट हैं. गांव की सरपंच सीट इस बार महिला के लिए आरक्षित की गई थी. परिवार ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए राजी किया और अंजू ने जीत हासिल की. उन्हें 1300 वोट मिले हैं. अंजू अपने गांव का विकास कराना चाहती हैं.

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21 साल की उम्र में सरपंच बनीं अंजू. 21 साल की उम्र में सरपंच बनीं अंजू.

नवीन कुमार

  • महेंद्रगढ़,
  • 16 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

Haryana Panchayat Election 2022: हरियाणा में पंचायती राज चुनाव के पहले दो चरण पूरे हो चुके हैं. पंच सरपंच चुने गए लोगों के नामों का भी ऐलान कर दिया गया है. इन नामों में सबसे चौंकाने वाला नाम महेंद्रगढ़ जिले के खुडाना गांव की नई सरपंच का है.

खुडाना गांव से 21 साल की मेडिकल स्टूडेंट को नया सरपंच चुना गया है. बीएएमएस (मेडिकल कोर्स) फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट अंजू चुनाव में खड़ी हुई थीं. उनको लोगों ने दिल खोल कर वोट दिया और अंजू अपने जिले की सबसे कम उम्र की सरपंच बन गई हैं.

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इस बार के चुनाव में खुडाना गांव के सरपंच की सीट महिला के लिए आरक्षित थी. गांव के ही डॉ. नरेश सिंह की बेटी अंजू तंवर को चुनाव लड़ाने का फैसला किया गया.

अधिकारी से जीत के बाद प्रमाणपत्र लेती अंजू तंवर.

दो नवंबर को सरपंच पद के लिए वोटिंग हुई. अंजू को 1,300 वोट मिले. उसकी प्रतिद्वंदी को 1,052 वोट मिले थे. चुनाव जीतकर अंजू ने नया कीर्तिमान रच दिया. 21 साल एक महीना 18 दिन की उम्र में अंजू अपने जिले में सबसे कम उम्र की सरपंच बनी हैं. 

जीत के बाद अंजू का हुआ स्वागत.

खुडाना गांव की आबादी दस हजार

महेंद्रगढ़ जिले के राजपूत बाहुल्य खुडाना गांव की आबादी 10 हजार है. वोटर्स की संख्या चार हजार है. कुछ 3,600 वोट  चुनाव के दौरान डाले गए थे, जिसमें से सबसे ज्यादा 1,300 वोट अंजू तंवर को मिले थे.

गांव की बेहतरी के लिए करना है काम : सरपंच अंजू

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पहली बार चुनाव लड़ने वाली अंजू को भारी मतों से जीत मिली. इसके बाद से वह बहुत खुश हैं. जीत के बाद पूरे गांव में उनका स्वागत किया गया. उनका कहना है कि गांव के लोगों ने मुझ पर भरोसा जताया है. उनके भरोसे पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगी.

अंजू ने कहा कि गांव की बेहतरी के लिए काम किया जाएगा. मैं खुद मेडिकल की स्टूडेंट हूं. इसलिए गांव के विद्यार्थियों को पढ़ाई को लेकर होने वाली परेशानियों को दूर करने काम किया जाएगा. गांव में लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर्स खोले जाएंगे.

राजनीति में आने वाली परिवार की पहली सदस्य

अंजू के परिवार से कोई भी राजनीति में नही हैं. वह अपने परिवार से राजनीति में प्रवेश करने वाली पहली सदस्य हैं. उनके पिता डॉक्टर हैं और अंजू खुद भी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही हैं.

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