कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती से बातचीत कर भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने की अपील की. इस पर बसपा चीफ मायावती ने यात्रा को लेकर कांग्रेस को शुभकामनाएं दीं. हालांकि, बसपा सुप्रीमो ने यात्रा में शामिल न होने की बात कही. उन्होंने यह भी बताया 30 तारीख को BSP की बड़ी मीटिंग है. इसके अलावा उन्होंने अन्य शेड्यूल का भी जिक्र किया.
बता दें कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक के लिए निकली कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' नए साल के आगाज के साथ ही उत्तर प्रदेश में दस्तक देने जा रही है. यात्रा तीन जनवरी को गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर से यूपी में एंट्री करेगी. राहुल गांधी के साथ पदयात्रा करने के लिए विपक्षी दल के नेताओं को भी निमंत्रण भेजा गया था.
मायावती के अलावा सपा प्रमुख अखिलेश यादव, आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी, सुभासपा के मुखिया ओम प्रकाश राजभर सहित तमाम विपक्षी दल के नेताओं को भारत जोड़ो यात्रा में शिरकत करने के लिए न्योता दिया गया.
राहुल गांधी की तरफ से अखिलेश यादव, मायावती और जयंत चौधरी को भेजे गए निमंत्रण पत्र पहुंच चुके हैं. जयंत चौधरी और मायावती को छोड़ दें तो किसी और दूसरे बड़े नेता की तरफ से राहुल की पदयात्रा में शामिल होने या नहीं शिरकत करने पर किसी तरह का कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया, सपा और बसपा दोनों के अलग-अलग एक्शन के सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं.
जयंत चौधरी भी नहीं होंगे शामिल
राहुल की तरफ से मिले प्रस्ताव के बाद आरएलडी ने यह फैसला लिया है कि जयंत चौधरी कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल नहीं होंगे. इसके लिए वजह बताई गई. कहा गया है कि जयंत चौधरी के कार्यक्रम पहले से तय हैं, जिसके चलते वो शिरकत नहीं कर पाएंगे. माना जा रहा है कि जयंत का राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा में ना शिरकत करने का फैसला अकेले का नहीं है बल्कि इसके पीछे गठबंधन के सहयोगी की राय भी शामिल है. जयंत और अखिलेश यादव दोनों के बीच इस मुद्दे पर कोई न कोई बातचीत जरूर हुई होगी. इसके बाद ही अखिलेश यादव से पहले जयंत ने अपनी व्यस्तता का हवाला देकर राहुल गांधी की इस भारत जोड़ो यात्रा में उत्तर प्रदेश में जुड़ने से मना कर दिया.
भारत जोड़ो यात्रा में क्यों नहीं शामिल होंगे जयंत?
सूत्रों की माने तो जयंत चौधरी के कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल नहीं होने के पीछे कोई ठोस वजह नहीं है. कांग्रेस नेताओं के वह करीब हैं और राहुल गांधी के करीबी दीपेंद्र हुड्डा के साथ उनकी अच्छी-खासी बनती है. गांधी परिवार के साथ भी उनकी निकटता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ जाने से उनकी सियासत को फायदा ही होगा नुकसान नहीं होगा, लेकिन जयंत चौधरी की 'ना' के पीछे अखिलेश यादव की 'ना' मानी जा रही है.
आशीष श्रीवास्तव