'नेहरू ने मंदिर बनवाया होता तो क्या देश का विकास होता?’ पूछने वाले केजरीवाल को क्यों चाहिये नोटों पर लक्ष्मी-गणेश!

अन्ना आंदोलन से निकलकर सियासी राह पर चलने वाले अरविंद केजरीवाल विकास के एजेंडे को लेकर आगे बढ़े थे. लेकिन जैसे-जैसे उनकी राजनीति आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चाल और चरित्र भी बदलता जा रहा है. कभी अपनी विकास की छवि को गढ़ने के लिए केजरीवाल बीजेपी के हिन्दुत्व की राजनीति पर सवाल खड़े करते थे, लेकिन अब उसी राह पर चलते नजर आ रहे हैं.

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कुबूल अहमद / स्वराज श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 4:22 PM IST

दिल्‍ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से भारतीय करेंसी पर महात्मा गांधी के साथ गणेश-लक्ष्‍मी की फोटो छापने की मांग उठाई है. केजरीवाल ने इसके पीछे तर्क दिया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था की हालत सुधरेगी, लेकिन इसे गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल के हिंदुत्‍व के दांव के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर केजरीवाल को विकास की राजनीति के साथ-साथ हिंदुत्व की सियासी राह पर आखिर क्यों चलना पड़ रहा है? 

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केजरीवाल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि मेरी केंद्र सरकार और पीएम से अपील है कि भारतीय करेंसी पर एक तरफ महात्मा गांधी की तस्वीर है, उसे वैसे ही रहने दें, लेकिन दूसरी तरफ भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की तस्वीर लगायी जाए. उन्होंने कहा कि इससे देश की गिरती इकोनॉमी को संभलने में मदद मिलेगी. नोटों पर लक्ष्मी गणेश की फोटो लगाने से देश को उनका आशीर्वाद मिलेगा. इसके लिए वह केंद्र सरकार और पीएम मोदी को एक लेटर भी लिखेंगे.

गुजरात चुनाव से पहले आए बयान के क्या मायने?

सीएम अरविंद केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब गुजरात में चुनावी सरगर्मी तेज है. माना जा रहा है कि जल्द ही चुनाव की तारीखों का ऐलान भी हो सकता है. अन्ना आंदोलन से निकले केजरीवाल ने सियासत में भ्रष्टाचार को खत्म कर विकास की राजनीति करने का वादा करके राजनीति में आए थे और बीजेपी के हिंदुत्व की पॉलिटिक्स पर सवाल खड़े करते थे. 

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केजरीवाल उस दौर में अपनी विकास वाली छवि गढ़ने में व्यस्त थे और तब यह दिखाना चाहते थे कि धर्म या मंदिर नहीं, बल्कि स्कूल और विकास उनका प्रमुख एजेंडा है. केजरीवाल ने 2018 में दिल्ली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, 'मैं सोच रहा था कि अगर जवाहर लाल नेहरू स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया की जगह मंदिर बना देते क्या इस देश का विकास हो सकता था?'

केजरीवाल ने 2014 में कानपुर में एक रैली में अपनी नानी का ज़िक्र करते हुए कहा था, 'मेरी नानी कहती है कि भगवान राम किसी मस्जिद को तोड़कर ऐसे मंदिर में नहीं बस सकते.'

केजरीवाल के तर्ज पर 2018 में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की जगह यूनिवर्सिटी बना देनी चाहिए. इस तरह से आम आदमी पार्टी धार्मिक  सियासत के बजाय विकास वाली राजनीति करने का एजेंडा सेट कर रही थी.

अब आम आदमी पार्टी ने बदला एजेंडा

हालांकि, सियासत ने ऐसी करवट ली कि आम आदमी पार्टी सिर्फ हिंदुत्व के एजेंडे पर ही नहीं बल्कि राममंदिर और भगवान को लेकर भी बदली है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल खुद को हनुमान भक्त बता रहे थे तो यूपी के चुनाव में राम मंदिर के दर्शन करने पहुंचे थे. इस तरह केजरीवाल ने हिंदुत्व कार्ड का इस्तेमाल कभी बीजेपी की हार्ड हिंदुत्व की काट में, कभी चुनाव के समय जनता से वोट की चाह में, तो कभी खुद को सच्चा हिंदू साबित करने के लिए किया. 

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बता दें कि नरेंद्र मोदी के सियासी उभार में हिंदुत्व के फॉर्मूले को सबसे बड़ा और अहम कारण माना जाता है तो साथ ही सियासत में इसे बीजेपी का सफल प्रयोग भी कहा गया. साल 2002 में मोदी ने जिस हिंदुत्व कार्ड के जरिए गुजरात में अपनी पहचान बनाई और सत्ता में आए और एक दशक से अधिक समय तक लगातार सत्ता संभाली. 2014 में इसी प्रयोग को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति में आए और फिर बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाई. बीजेपी इसी हिंदुत्व फॉर्मूले पर लगातार जीत का परचम फहरा रही है. 

मोदी के अगुवाई में बीजेपी को मिल रही जीत का श्रेय कहीं ना कहीं हिंदुत्व की राजनीति को दिया जाता है और गुजरात को इसकी प्रयोगशाला के तौर पर देखा जाता है. गुजरात फिर एक ऐसे ही मोड़ पर दिख रहा है. जहां 27 साल से बीजेपी सत्ता में काबिज है तो आम आदमी पार्टी गुजरात की सत्ता में आने के लिए जद्दोजहद कर रही है. केजरीवाल लगातार सियासी प्रयोग करते दिख रहे हैं. एक तरफ मोदी के हिंदुत्व की राजनीति की काट करने की कोशिश है तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी का विकल्प बनने की कवायद है.

हिंदुत्व की पिच पर उतरे सीएम केजरीवाल

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केजरीवाल गुजरात से अपनी सियासी पहचान बनाने की कोशिश में हैं. यही वजह है कि बीजेपी के हार्ड हिंदुत्व के जवाब में केजरीवाल भी हिंदुत्व की पिच पर उतर चुके हैं. केजरीवाल ने सोमनाथ मंदिर के दर्शन से चुनावी बिगुल फूंका है. गुजरात में में केजरीवाल ने कहा था,' जिस दिन मेरा जन्म हुआ, उस दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी थी. मुझे भगवान ने एक स्पेशल काम देकर भेजा है. वो है इन 'कंस की औलादों' का नाश करने के लिए.'

गुजरात में गायों के लेकर भी अरविंद केजरीवाल बयान दे चुके हैं. उनका कहना था कि हम सब लोग गाय को अपनी माता मानते हैं, अगर गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो हर गाय की अच्छी तरह से देखभाल करेंगे. हर गाय के रख-रखाव के लिए हम लोग 40 रुपये प्रति गाय प्रति दिन के हिसाब से देंगे. वहीं, गुजरात यात्रा के दौरान केजरीवाल हिंदूवादी वेशभूषा में सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने भी पहुंचे थे. इसके अलावा वो गुजरात में द्वारकाधीश मंदिर और स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर भी होकर आए हैं.

गुजरात के ही दाहोद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि आम आदमी पार्टी गुजरात में सत्ता में आती है, तो AAP भगवान राम के दर्शन के इच्छुक लोगों की अयोध्या यात्रा का पूरा खर्च वहन करेगी. इतना ही नहीं केजरीवाल ने अब नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर छापने की आवाज उठाई है. गुजरात में केजरीवाल एक हिंदूवादी नेता की छवि बनाते दिख रहे हैं. ऐसे में केजरीवाल के मंदिरों में माथा टेकने और हिंदुत्व कार्ड खुलकर खेलने से से बीजेपी बेचैन है और सवाल खड़े करने लगी है.

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बीजेपी, कांग्रेस के निशाने पर सीएम केजरीवाल 

हरियाणा के गृह मंत्री और बीजेपी के फायरब्रांड नेता अनिल विज ने ट्वीट कर अरविंद केजरीवाल पर तंज किया है. उन्होंने कहा है कि आखिरकार लक्ष्मी के पुजारी केजरीवाल के होठों पर बात आ ही गई. अनिल विज ने कहा कि बहाना चाहे नोट पर तस्वीर छापने का हो लेकिन हर काम करने से पहले लक्ष्मी आंखों के सामने ही रहेगी. उन्होंने भ्रष्टाचार के मसले पर केजरीवाल को घेरते हुए कहा कि इसे कहते हैं भक्ति. केजरीवाल तेरी माया अपरंपार.

बीजेपी आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने भी ट्वीट कर केजरीवाल को घेरा है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि केजरीवाल ने हाल ही में फतवा जारी कर दिल्ली में पटाखे बैन किए थे. उन्होंने केजरीवाल को कट्टर हिंदू विरोधी बताया है. वहीं, बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने केजरीवाल को चुनावी हिंदू बताते हुए कहा है कि वे हिंदू होने का नाटक कर रहे हैं.

भारतीय करेंसी पर लक्ष्मी और गणेश की तस्वीर लगाने की मांग पर केजरीवाल पर बीजेपी से लेकर बसपा और कांग्रेस तक  ने सवाल खड़े किए हैं. मायावती के भतीजे और बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने आम आदमी पार्टी को 'रंग बदलू पार्टी' कह डाला. केजरीवाल का 'चाल-चरित्र और चेहरा असली रूप अब सामने आ चुका है. उन्होंने कहा कि इनका कोई चेहरा ही नहीं है जब जहां जैसी जरुरत होती है ये वैसे ही बन जाते हैं. पंजाब चुनाव में किसानों के हितैषी थे और अब गुजरात चुनाव आते ही इनके अंदर का हिंदुत्व जाग उठा है. 

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कांग्रेस ने भी केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के सभी निर्णय बीजेपी ही लेती है. उन्होंने इसे वोट की राजनीति के लिए की गई मांग बताया और कहा कि बीजेपी ने नोटबंदी कर मां लक्ष्मी का अपमान किया था. तभी से जीडीपी पटरी पर नहीं लौट पाई.

गौरव वल्लभ ने कहा कि पीएम मोदी और अरविंद केजरीवाल को मां लक्ष्मी की पूजा कर उनसे माफी मांगनी चाहिए. साथ ही कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने आम आदमी पार्टी को बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बी टीम बताया और कहा कि ये मांग उनकी वोट की राजनीति को लेकर है. इतना ही नहीं केजरीवाल के साथ काम कर चुके आशुतोष और कुमार जैसे लोगों ने भी सवाल खड़े किए हैं.

 

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