पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल नहीं रहे. सुपरकॉप केपीएस गिल का पूरा नाम कंवर पाल सिंह गिल है. 1958 में उन्होंने 24 साल की अवस्था में भारतीय पुलिस सेवा ज्वॉइन की. गिल को असम-मेघालय काडर मिला. गिल का इस बारे में कहना था कि उन्होंने स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए असम-मेघालय काडर चुना. अगर वो अपने गृह राज्य पंजाब को चुनते तो राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से स्वतंत्र रूप से काम करना संभव नहीं हो पाता. उन्होंने सिविल सर्विस में कामकाज के लिए 1989 में पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
पंजाब में आतंकवाद के खात्मे और अपनी आक्रामक नीतियों के लिए केपीएस गिल को खूब ख्याति मिली. दिलचस्प बात ये है कि असमें अपनी दशक भर की सेवा के दौरान गिल किसी एनकाउंटर का हिस्सा नहीं रहे.
केपीएस गिल की जीवनी पर एक किताब बनाई गई थी. किताब का नाम ‘दि पैरामाउंट कॉप’ था. इस किताब पर पूर्व कांग्रेसी विधायक सुखपाल खैहरा ने कई सवाल उठाए थे. साथ में मुख्यमंत्री बादल पर आरोप लगाए गए थे. खैहरा का कहना था कि आंतकवाद के दौर में वो अक्सर मिलकर उनसे बातें करते थे.
वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी रूपन बजाज ने उन पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था. वे इस मामले को अदालत ले गईं, जहां 17 साल तक मुकदमा चला था. वह उस समय वित्त सचिव के रूप में काम कर रही थीं. उसके बाद उन्हें दोषी ठहराया गया था. फिर उसरे बाद गिल की सज़ा कम कर दी गई. साथ ही जुर्माना भी कम कर दिया गया. उन्हें जेल भी नहीं भेजा गया था.
गिल ने जेटली पर आरोप लगाया था. उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा था. जिसमें उसमें कहा था कि जेटली ने अपनी बेटी सोनाली को हॉकी इंडिया का वकील नियुक्त किया जब वह हॉकी इंडिया लीग के सलाहकार बोर्ड में थे.
2008 में केपीएस गिल की अगुवाई भारतीय हॉकी महासंघ में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भारतीय ओलंपिक संघ ने आईएचएफ को सस्पेंड कर दिया. ओलंपिक संघ के सुरेश कलमाड़ी ने तब कहा था कि केपीएस गिल के प्रति पूरा सम्मान है, लेकिन यह निजी मामला नहीं है.
पंजाब चुनाव के बारे में जब उनसे पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आई तो एक बार फिर आतंकवाद की वापसी हो सकती है. उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी पंजाब में कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रही है.
पंजाब चुनाव के बारे में जब उनसे पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आई तो एक बार फिर आतंकवाद की वापसी हो सकती है. उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी पंजाब में कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रही है.
केपीएस गिल छत्तीसगढ़ के पूर्व सुरक्षा सलाहकार भी रहे थें. वो 'वेतन लो, मौज करो’ बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे थे. सुकमा हमले के बाद छत्तीसगढ़ सरकार बहुत भड़के. उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार को टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे नक्सली मामलों पर अधिक ध्यान न दें. सरकार उन्हें वेतन-भत्ते दे रही है, वो आराम से मौज करें.