ला-नीना का दिखेगा असर, इस साल पड़ेगी कड़ाके की ठंड, IMD ने दी ये जानकारी

मौसम विभाग के मुताबिक, सितंबर में ला-नीना के एक्टिव होने की आशंका है, जिससे इस साल भारत में कड़ाके की ठंड देखने को मिल सकती है. ला-नीना से मॉनसून तो बेअसर रहा लेकिन अगर सर्दियों की शुरुआत से ठीक पहले ला-नीना परिस्थितियां बनीं को दिसंबर के मध्य से जनवरी तक कड़ाके की सर्दी रहने वाली है

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कुमार कुणाल

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:53 PM IST

भारतीय मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि सितंबर के दौरान ला नीना एक्टिव होने की उम्मीद है. मॉनसून के मौसम के अंत में होने वाली यह घटना संभावित रूप से चरम सर्दियों की स्थिति के लिए चेतावनी के रूप में काम कर सकती है. आम तौर पर ला नीना सर्दियों के दौरान तापमान में काफी गिरावट देखने को मिलती है, जिसके साथ अक्सर बारिश भी बढ़ जाती है. 

इस साल पड़ेगी कड़ाके की ठंड

मौसम विभाग की मानें तो ला-नीना परिस्थतियां अब मॉनसून के आखिरी हफ्ते या इसके खत्म होने पर ही विकसित होंगी. यानी ला-नीना से मॉनसून तो बेअसर रहा लेकिन अगर सर्दियों की शुरुआत से ठीक पहले ला-नीना परिस्थितियां बनीं को दिसंबर के मध्य से जनवरी तक कड़ाके की सर्दी रहने वाली है. मौसम विभाग का अनुमान है कि ला-नीना के सितंबर से नवंबर के दौरान बनने की 66 फीसदी संभावना है. सर्दी में नवंबर से जनवरी 2025 तक इसके उत्तरी गोलार्ध में बने रहने के आसार 75 फीसदी से भी अधिक हैं. 

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फिलहाल पश्चिमी प्रशांत महासागर में सतह का तापमान औसत से अधिक है, जबकि पूर्वी प्रशांत महासागर में औसत के करीब या नीचे बना हुआ है. चूंकि दोनों छोर के तापमान के बीच अंतर शून्य के करीब है इसलिए एनसो न्यूट्रल परिस्थितियां बनी हुई हैं. IMD के मुताबिक, ला-नीना परिस्थितियां पैदा होने में देरी हुई है.

आमतौर पर देश से मॉनसून 15 अक्टूबर तक विदा हो जाता है. ऐसे में इसके दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून पर असर डालने की संभावना नहीं है. अब यह सितंबर से नवंबर के बीच विकसित हो सकती है. अक्टूबर के आखिर से दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मॉनसून आता है, उस पर ला-नीना का असर हो सकता है. 

IMD ने दी जानकारी

ला नीना जिसका स्पेनिश में अनुवाद 'एक लड़की' होता है, एल नीनो के विपरीत है और यह पूरी तरह से विपरीत जलवायु व्यवहार के लिए जिम्मेदार है. ला नीना घटना के दौरान एक मजबूत पूर्वी धारा समुद्र के पानी को पश्चिम की ओर ले जाती है, जिसके कारण समुद्र की सतह ठंडी हो जाती है विशेष रूप से भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में सतह ठंडी हो जाती है. यह घटना एल नीनो के बिल्कुल विपरीत है, जिसका स्पेनिश में अर्थ 'एक छोटा लड़का' होता है और यह व्यापारिक हवाओं के कमजोर होने पर गर्म समुद्री परिस्थितियों को उत्पन्न करता है, जिससे गर्म पानी अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर पूर्व की तरफ वापस चला जाता है. 

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ला नीना और अल नीनो दोनों ही समुद्री और वायुमंडलीय घटनाएं हैं, जो आमतौर पर अप्रैल और जून के बीच शुरू होती हैं और अक्टूबर और फरवरी तक गति पकड़ लेती हैं. हालांकि, ये जलवायु घटनाएं आमतौर पर 9-12 महीने तक चलती हैं, लेकिन कभी-कभी ये दो साल तक भी जारी रह सकती हैं. सामान्य परिस्थितियों में व्यापारिक हवाएं भूमध्य रेखा के साथ पश्चिम की ओर बहती हैं, जो दक्षिण अमेरिका से एशिया की तरफ गर्म पानी ले जाती हैं. गर्म पानी के विस्थापन से समुद्र की गहराई से ठंडा पानी ऊपर उठता है, जिससे संतुलन बना रहता है. 

हालांकि, जब ये नियमित स्थितियां अल नीनो या ला नीना द्वारा बाधित होती हैं तो वैश्विक जलवायु में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं. जबकि अल नीनो प्रशांत क्षेत्र में गर्म हवा के तापमान और परिणामस्वरूप, गर्म वैश्विक तापमान की ओर ले जाता है, ला नीना समुद्र की सतह और उसके ऊपर के वायुमंडल को ठंडा करके इसके विपरीत करता है. 

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