वेदांता ग्रुप के चेयरमैन और उद्योगपति अनिल अग्रवाल बुधवार को अपने 49 वर्षीय बेटे अग्निवेश के निधन से पूरी तरह टूट गए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट लिखा है और अपना दर्द साझा किया है. अग्रवाल ने बेटे से जुड़ी यादें शेयर कीं और उससे किए वादे का पूरा करने का इरादा दोहराया है. अग्रवाल ने लिखा, एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाए, इससे बुरा और क्या हो सकता है.
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का बुधवार को अमेरिका में निधन हो गया है. अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के लिए गए थे, जहां एक हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान अचानक उन्हें कार्डिक अरेस्ट आया और उनकी मौत हो गई.
‘मेरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन’
बेटे के निधन के बाद अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी. उन्होंने लिखा, आज मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है. मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा. एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाए, इससे बुरा और क्या हो सकता है. उन्होंने बताया कि अग्निवेश अपने एक दोस्त के साथ अमेरिका में स्कीइंग करने गया था, जहां हादसा हुआ. वह माउंट साइनाई हॉस्पिटल, न्यूयॉर्क में ठीक हो रहा था. हमें लगा सब ठीक हो जाएगा. लेकिन अचानक कार्डिक अरेस्ट हो गया और हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया.
पटना से शुरू हुई अग्निवेश की कहानी
अनिल अग्रवाल ने बेटे की जिंदगी के सफर को भी याद किया. उन्होंने लिखा कि 3 जून 1976 को जब अग्निवेश का जन्म पटना में हुआ था, वह पल आज भी उनकी आंखों के सामने है. एक मिडिल क्लास बिहारी परिवार में जन्मा था मेरा अग्नि.
उन्होंने बेटे को बचपन से ही चंचल, शरारती और हमेशा मुस्कुराने वाला बताया. उन्होंने कहा, अग्नि अपनी मां का दुलारा था. यारों का यार था और अपनी बहन प्रिया को लेकर सबसे ज्यादा प्रोटेक्टिव था.
पढ़ाई, खेल और संगीत में अव्वल
अग्निवेश ने अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई की थी. अनिल अग्रवाल के मुताबिक, अग्निवेश की पर्सनैलिटी बेहद मजबूत थी. वह बॉक्सिंग चैंपियन था, घुड़सवारी का शौकीन था और शानदार म्यूजिशियन भी. पढ़ाई के बाद उसने फुजैराह गोल्ड जैसी बड़ी कंपनी खड़ी की और बाद में हिंदुस्तान जिंक का चेयरमैन भी बना.
उपलब्धियों से ऊपर इंसान
अनिल अग्रवाल ने लिखा कि तमाम उपलब्धियों के बावजूद अग्निवेश बेहद सादा इंसान था. वह हमेशा अपने दोस्तों और सहकर्मियों के बीच रहता था. जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था. जमीन से जुड़ा, सीधा, सच्चा, जिंदादिल और इंसानियत से भरा हुआ.
उन्होंने कहा, वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं था. वह मेरा दोस्त था. मेरी शान था. मेरी पूरी दुनिया था.
'हम टूट से गए हैं'
पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि वह और उनकी पत्नी किरण पूरी तरह टूट गए हैं. हम बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा चला गया. लेकिन इसी दर्द के बीच उन्होंने वेदांता में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को भी अपने बच्चे जैसा बताया. वेदांता में काम करने वाले सभी लोग हमारे बेटे-बेटियां ही तो हैं.
देश के लिए अधूरा सपना
अनिल अग्रवाल ने लिखा कि उनका और अग्निवेश का सपना था भारत को आत्मनिर्भर बनाना. वह हमेशा कहता था, पापा हमारे देश में क्या नहीं है, फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें. उन्होंने बताया कि दोनों की दिली इच्छा थी कि कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला आत्मनिर्भर बने और हर युवा को रोजगार मिले.
75 प्रतिशत संपत्ति समाज के नाम
अनिल अग्रवाल ने उस वादे को दोहराया, जो उन्होंने बेटे के साथ किया था. उन्होंने लिखा कि वेदांता ग्रुप की कमाई का 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समाज के कामों में लगाया जाएगा. आज फिर वही वादा दोहराता हूं. अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा.
‘तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा’
पोस्ट के अंत में अनिल अग्रवाल ने लिखा, अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि. तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी. कितने सपने थे, कितने अरमान थे. सब अधूरा रह गया. उन्होंने कहा कि बेटे के बिना जिंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन वे उसके सपनों को अधूरा नहीं रहने देंगे.
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