Kerala: 17 साल की लड़की ने पिता को दान किया Liver, बनी सबसे छोटी उम्र की डोनर

केरल में 17 साल की लड़की ने पिता को अपने लीवर का एक हिस्सा दान किया. उसके पिता को पैर की बीमारी थी. जांच में सामने आया था कि पिता के लीवर में भी बीमारी का असर हुआ है और कैंसर के लक्षण दिख रहे हैं. कोर्ट की परमिशन के बाद बेटी ने पिता को लीवर डोनेट किया है.

Advertisement
केरल मे नाबालिग बेटी ने किया पिता को लीवर डोनेट. केरल मे नाबालिग बेटी ने किया पिता को लीवर डोनेट.

शिबिमोल

  • केरल,
  • 20 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 5:17 PM IST

केरल (Kerala) में 17 साल की लड़की देवानंदा ने अपने बीमार पिता को अपने लीवर का हिस्सा दान किया. मगर, उसके लिए यह आसान नहीं था. दरअसल, 18 साल की कम उम्र में ऑर्गन डोनेट नहीं किया जा सकता है. अपने पिता की जान बचाने के लिए देवानंदा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

कोर्ट की अनुमित मिलने के बाद लीवर डोनेट करने की प्रिक्रिया पूरी की गई. देवानंदा का कहना है कि ऐसा करना 'बलिदान' नहीं, मेरी जिम्मेदारी है. अब उसके पिता की हालत में सुधार हो रहा है. जानकारी के मुताबिक, त्रिशूर में कैफ चलाने वाले प्रतीश पैर में द्रव संचय (Fluid accumulation) से पीड़ित थे. जांच में सामने आया था कि उन्हें लीवर में गंभीर बीमारी हो रही है. साथ ही कैंसर के लक्षण भी नजर आ रहे हैं.

Advertisement

जताई थी पिता को लीवर डोनेट करने की इच्छा

परिवार और ज्यादा परेशानी में तब आ गया, जब डॉक्टरों ने कहा कि जल्द से जल्द प्रतीश का लीवर प्रत्यारोपण (Liver Transplantation) करना होगा. इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है. इसके बाद प्रतीश के लिए मैचिंग डोनर की तलाश की गई. मगर, डोनर नहीं मिला. तब प्रतीश की 17 साल की बेटी देवानंदा आगे आई और पिता को लीवर डोनेट करने की इच्छा जाहिर की. 

देवानंदा के लीवर डोनेट करने में था पेंच

देवानंदा की इच्छा जानकर डॉक्टरों को खुशी तो हुई, लेकिन समस्या यह थी कि वह नाबालिग थी. मानव अंगों के प्रत्यारोपण से संबंधित मौजूदा अधिनियम 1994 के अनुसार, डोनर की आयु 18 साल नहीं होने पर अंग दान नहीं किया जा सकता है.

देवानंदा ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

देवानंदा के पिता प्रतीश का इलाज अलुवा के राजागिरी अस्पताल में चल रहा था. अस्पताल में मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांट यानी बहु-अंग प्रत्यारोपण सेवाओं के प्रमुख डॉ. रामचंद्रन नारायणमेनन से देवानंदा ने जानकारी ली. डॉक्टर ने बताया कि यदि वह कोर्ट से लीवर डोनेट की अनुमति ले लें, तो कई समस्या नहीं होगी. 

Advertisement

कोर्ट ने सुनाया देवानंदा के पक्ष में फैसला

मामले की सुनावाई न्यायमूर्ति वीजी अरुण की एकल पीठ में हुई थी. न्यायमूर्ति वीजी अरुण यह कहते हुए लीवर डोनेट की अनुमति दी, "पिता के जीवन को बचाने के लिए याचिकाकर्ता की लड़ाई की सराहना करता हूं. धन्य हैं वे माता-पिता जिनके पास देवानंदा जैसे बच्चे हैं. यह ध्यान देने योग्य है कि देवानंदा द्वारा की गई अविश्वसनीय लड़ाई आखिरकार सफल हो गई है."

9 फरवरी को की गई प्रतीश की सर्जरी

9 फरवरी को अलुवा के राजागिरी अस्पताल में डॉ. रामचंद्रन नारायण मेनन के नेतृत्व में देवानंदा के लीवर का एक हिस्सा उसके पिता प्रतीश को ट्रांसप्लांट किया गया. इस तरह से पिता को लीवर का एक हिस्सा दान करने के बाद 17 साल की देवानंदा देश की सबसे कम उम्र की अंग दाता (Organ Donater) बन गई हैं.

डाइट बढ़ाई, जिम में बहाया पसीना

त्रिशूर सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली देवानंदा कहती हैं कि पिता को लीवर डोनेट करने से पहले शरीर में काफी बदलाव किए. जिम ज्वाइन की और अपनी डाइट को बढ़ाया. नियमित व्यायाम शुरू किया. यह सुनिश्चित किया कि लीवर डोनेट करने के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हो.

देवानंदा का त्याग देखते हुए अस्पताल ने माफ की फीस 

Advertisement

देवानंदा की वीरता की सराहना करते हुए राजागिरी अस्पताल ने डोनर सर्जरी सहित उनके इलाज के खर्चों को माफ कर दिया. वहीं, देवानंदा का कहना है कि कई लोग इसे एक बलिदान के रूप में देख रहे हैं. मगर, मुझे लगता है कि मैं अपने पिता के लिए यह कर सकती थी. यह बलिदान नहीं, मेरी जिम्मेदारी है.

ब्रेन डेथ के बाद ऑर्गन डोनेशन बहुत कम : डॉ. रामचंद्रन

राजगिरी अस्पताल के डॉ. रामचंद्रन का कहना है कि सर्जरी के बाद से देवानंदा को कोई परेशानी नहीं है. उसके पिता भी ठीक हो रहे हैं. हमें ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि केरल में पिछले कुछ सालों से ब्रेन डेथ (Brain Death) के बाद ऑर्गन डोनेशन बहुत कम हो रहा है. यह तभी बदल सकता है, जब ब्रेन डेथ के बाद मरीज के अंग उनके परिजन दान करें.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement