सबरीमला मंदिर सोना चोरी विवाद क्या है, जानें- इस गोल्ड का विजय माल्या से क्या कनेक्शन

केरल के सबरीमाला मंदिर में 2019 से चल रहे सोना चोरी के विवाद में SIT ने जांच कर मुख्य पुजारी कंदरारू राजीवरु समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. चोरी की गई सोने की परतें विजय माल्या द्वारा 1998-99 में दान की गई थीं. जांच में मंदिर की मूर्तियों और तांबे की प्लेटों से लगभग 4.5 किलो सोना गायब पाया गया.

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सबरीमाला में सोना चोरी का मामला 2019 में सामने आया था सबरीमाला में सोना चोरी का मामला 2019 में सामने आया था

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST

केरल का प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ सबरीमला एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं. इस बार विवाद मंदिर में स्थापित मूर्तियों से सोना चोरी का है. ये चोरी साल 2019 में सामने आई थी. आरोप है कि मूर्तियों पर चढ़ाई गई सोने की परत उतारकर चुरा ली गई है. मंदिरों में देव प्रतिमाओं पर सोना-चांदी मढ़वाना आम बात है.

यह श्रद्धालुओं का दान का ही एक तरीका है. लेकिन सबरीमाला मंदिर में हुई इस चोरी ने श्रद्धालुओं की भावना को चोट पहुंचाई है और मामला लंबे समय से सुर्खियों में है. ताजा अपडेट ये है कि मामले की जांच कर रही एसआईटी ने शुक्रवार को मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदरारू राजीवरु को गिरफ्तार कर लिया है. 

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सबरीमाला में सोना चोरी का विवाद कहां से शुरू हुआ?

कहने को ये सोना चोरी का मामला साल 2019 से सामने आया, लेकिन इस विवाद का इतिहास साल 1998 से जुड़ा हुआ है.  फिलहाल 2019 की ही बात करते हैं.  साल 2019 में मंदिर के द्वारपालक (द्वारपाल देवताओं) मूर्तियों और कुछ अन्य हिस्सों पर चढ़ी सोने की परत को मरम्मत और दोबारा गोल्ड प्लेटिंग के लिए ले जाया गया था. 

देवस्वोम बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, उस समय करीब 42.8 किलोग्राम सोना प्लेटों के रूप में निकाला गया और इसे चेन्नई स्थित एक निजी एजेंसी को भेजा गया. जब ये प्लेटें वापस आईं, तो उनका वजन केवल 38.2 किलोग्राम पाया गया. यानी लगभग 4.5 किलोग्राम सोना कम था, जिसे शुरुआत में तकनीकी कारणों और घिसावट से जोड़कर टाल दिया गया.

शुक्रवार को सोना चोरी मामले में 11वीं गिरफ्तारी हुई है. मंदिर के तंत्री कंदरारू राजीवरु गिरफ्तार

कुछ समय पहले कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष आयुक्त की रिपोर्ट में पता चला कि मूर्तियों और मंदिर के कई हिस्सों से 'सोने की परत' हटा ली गई थी. इसके बाद सितंबर 2025 में केरल हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुरू की. कोर्ट में जस्टिस राजा विजयराघवन और जस्टिस केवी जयकुमार ने मंदिर के अधिकारियों के दस्तावेज पुरानी और नई तस्वीरें देखीं. ये दस्तावेज विशेष जांच टीम (SIT) ने इकट्ठे किए थे. जजों ने कहा कि जब उन्होंने मूर्तियों की मरम्मत के पूरे रिकॉर्ड मंगवाए, तो मामले की गंभीरता सामने आई. 

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मूर्तियों को बाहर ले जाने की इजाजत क्यों दी?
मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार, करीब 30.3 किलो सोना विजय माल्या (जो बाद में भगोड़ा घोषित हुए) ने 1998-99 में दान किया था. इस सोने से मूर्तियां, स्तंभ, दरवाजे के मेहराब और भगवान अयप्पा की कहानियां दिखाने वाले पैनल पर सोने की परत चढ़ाई गई थी. 2019 में मंदिर प्रबंधन देखने वाले 'त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB)' ने उन्नीकृष्णन पोट्टी को मूर्तियों पर नई सोने की परत चढ़ाने के लिए उन्हें बाहर ले जाने की इजाजत दी थी.

दो महीने बाद जब मूर्तियां वापस लाई गईं, तो उनका वजन नहीं तौला गया, लेकिन बाद की जांच में पता चला कि वजन बहुत कम हो गया था. SIT की जांच से दरवाजों की चौखटों से भी चोरी का पता चला. कुल मिलाकर 2019 से अब तक करीब 4.5 किलो सोना गायब होने की जानकारी सामने आई.

बोर्ड ने कीमती चीजों को रिकॉर्ड में 'तांबे की प्लेटें' लिखा
इसमें ध्यान देने वाली बात यह भी है कि आमतौर पर मरम्मत मंदिर के अंदर ही होती है, लेकिन पोट्टी को मूर्तियां बाहर ले जाने की अनुमति देने को भी कोर्ट ने गलत माना था. सबसे हैरानी की बात – कीमती सोने वाली चीजों को बोर्ड ने दस्तावेज में 'तांबे की प्लेटें' लिखकर दर्ज किया था!

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मरम्मत के बाद पोट्टी को करीब '475 ग्राम अतिरिक्त सोना' रखने की गलत तरीके से इजाजत मिल गई. पोट्टी ने एक ईमेल में बोर्ड से इस सोने को अपनी रिश्तेदार की शादी में इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी. नवंबर–दिसंबर 2025 के दौरान जांच एजेंसी ने कई पूर्व और मौजूदा मंदिर प्रशासन से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ की और कुछ गिरफ्तारियां भी की गईं. वैज्ञानिक परीक्षण के लिए सोने की प्लेटों के सैंपल लिए गए, ताकि यह तय किया जा सके कि वास्तव में कितना सोना गायब हुआ है और कितना वापस लौटाया गया.

मंदिर के द्वारपाल की प्रतिमा, जिनकी प्रतिमा से सोना चोरी हुआ है

SIT की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि मंदिर में प्रभा मंडलम में लगी तांबे की प्लेटों से भी सोना गायब है. इनमें शिव मूर्ति, व्याली रूपम (नक्काशीदार आकृतियां), सोपानम (सीढ़ियां) और गर्भगृह से जुड़े अन्य हिस्से शामिल हैं, जहां से सोना चोरी हुआ है. हालांकि SIT के मुताबिक, भगवान अयप्पा की मूल मूर्ति से सीधे सोना गायब होने की पुष्टि नहीं है. हालांकि मंदिर की पूरी संरचना पर सोने की परत चढ़ी हुई है, जो 1998-99 में दान किए गए करीब 30 किलो सोने से की गई थी.

सोना निकालने के लिए मंदिर से बाहर ले जाए गए आभूषणों और प्लेटों से रासायनिक मिश्रण (केमिकल प्रोसेस) के जरिए सोना अलग किया गया. यह प्रक्रिया चेन्नई की एक फर्म में हुई, जहां से सोना निकालकर कम मात्रा में दोबारा प्लेटिंग की गई. SIT के अनुसार अलग किया गया सोना बेल्लारी के ज्वेलर गोवर्धन रोड्डम के पास होने की बात सामने आई है. अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें स्पॉन्सर उन्नीकृष्णन पोट्टी, ज्वेलर गोवर्धन रोड्डम और चेन्नई की फर्म स्मार्ट क्रिएशंस से जुड़े पंकज भंडारी शामिल हैं. गिरफ्तार आरोपियों में केरल की सत्ताधारी CPI(M) के तीन नेता भी शामिल हैं, जिनमें पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार का नाम भी शामिल है.

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विजय माल्या से कैसे जुड़ गया मामला
इस पूरे केस में भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या का नाम सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक साल 1998-1999 में जो 30 किलो सोना दान कर प्रतिमाओं पर मढ़वाया गया था, वह विजय माल्या की ओर से ही दान किया गया था.

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