भारत के 74वें गणतंत्र दिवस पर पूरे देश में जश्न मनाया गया. राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी के अवसर पर कर्तव्य पथ पर परेड का आयोजन किया गया. वैसे तो ये परेड हर साल बेहद अहम होती है. लेकिन इस बार की परेड कई मायनों में बेहद खास रही. इस बार की परेड में पहली बार हमें आत्मनिर्भर भारत का दम देखने को मिला. पहली बार 21 तोपों की सलामी 25 पाउंडर बंदूकों की जगह 105 mm आईएफजी स्वदेशी गन से दी गई. ये भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.
परेड में इस बार एक और चीज बेहद खास रही. दरअसल, इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में नौसेना का आईएल-38 विमान आखिरी बार शामिल हुआ. परेड में शामिल इस विमान का कौशल लोगों को आखिरी बार देखने मिला. इस समुद्री टोही विमान ने 46 साल तक नौसेना की सेवा की है. फ्लाई पास्ट में भाग लेने वाले 44 विमानों में नौ राफेल जेट और हल्के हमलावर हेलीकॉप्टर सहित अन्य विमान शामिल रहे.
इस बार परेड में मिस्र का 120 सदस्यीय मार्चिंग दस्ता परेड में शामिल हुआ. अग्निवीरों को भी परेड में शामिल किया गया. इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में मिस्र के राष्ट्रपति भी शामिल हुए. गणतंत्र दिवस की परेड सुबह 10.30 बजे विजय चौक से शुरू हुई और लाल किले की ओर बढ़ी. परेड कर्तव्य पथ, सुभाष चंद्र बोस गोलचक्कर, तिलक मार्ग और बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग और लाल किले से होकर गुजरी.
26 जनवरी की परेड में इस बार मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी मुख्य अतिथि रहे. 68 वर्षीय प्रभावशाली अरब नेता ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह की शोभा बढ़ाई. सिसी के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ, जिसमें पांच मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी थे. अब से पहले मिस्र के राष्ट्रपति ने तीसरे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अक्टूबर 2015 में भारत का दौरा किया था, जिसके बाद सितंबर 2016 में उनकी राजकीय यात्रा हुई थी. यह पहली बार है कि जब मिस्र के राष्ट्रपति को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया.
पैसेंजर ड्रोन का जादू, नारी शक्ति का दम, गणतंत्र दिवस परेड में ये रहेगा खास
aajtak.in