बजट सत्र के चौथे दिन संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई. विपक्ष लगातार हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा करता रहा और सदन में सरकार विरोधी नारे भी लगे. हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले 2 बजकर 30 मिनट और फिर 6 फरवरी को दिन में 11 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. इससे पहले हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन में कुछ हल्के-फुल्के पल भी नजर आए.
दरअसल, राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा ने नोटिस रिजेक्ट किए जाने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि नियम 267 के तहत उनकी ओर से 2 फरवरी को नोटिस दी गई थी जिसे ये कहते हुए खारिज कर दिया गया कि ये ऑर्डर में नहीं है. शिवा ने आसन से ये बताने का अनुरोध किया कि किस खामी के कारण उनकी नोटिस खारिज की गई जिससे वे भविष्य में उस खामी को सुधार सकें.
इसके जवाब में सभापति ने नियम 267 और 8 दिसंबर 2022 को आसन की ओर से जारी दिशा-निर्देश देखने के लिए कहा. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि अगर इसके बाद भी कोई संदेह हो तो भोजन अवकाश के दौरान मुझसे मेरे कक्ष में मिलने का समय निकालें. सभापति ने हल्के अंदाज में सांसद तिरुचि शिवा से कहा कि आपको दावत दी जाएगी जिसमें आपकी पसंद का खाना होगा.
राज्यसभा के सभापति ने इसके बाद सख्त रुख भी दिखाया. उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही तभी जारी रह सकती है जब सब व्यवस्थित रहे. सभापति ने कहा कि अगर सदन व्यवस्थित नहीं रहेगा तो कार्यवाही को जारी नहीं रखा जा सकता. नोटिस रिजेक्ट किए जाने को लेकर उन्होंने साफ कहा कि मैंने अपना फैसला सुना दिया है और आगे इसे लेकर कोई चर्चा नहीं होगी.
राज्यसभा के सभापति ने ये भी कहा कि संसदीय लोकतंत्र आसन की मजबूती से ही चलता है. उन्होंने कहा कि मैंने अपना फैसला दे दिया है और मेरे फैसले की लगातार अवहेलना की गई है. सभापति ने कहा कि छात्रों ने भी उनसे पूछा है कि उनके फैसले की लगातार अवहेलना कैसे की जा रही है. इसके बाद सदन में हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजकर 30 मिनट तक के लिए स्थगित कर दी.
इससे पहले, अगले हफ्ते सदन की कार्यवाही को लेकर केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधर ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के साथ ही बजट पर सामान्य चर्चा होगी. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर अडानी ग्रुप के मुद्दे पर सरकार को घेरा. विपक्षी सदस्यों ने नियमों 267 के तहत स्थगन प्रस्ताव की नोटिस अडानी ग्रुप को लेकर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आरोप पर चर्च की मांग करते हुए दी थी.
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