ज्योतिष की तरह हाथ देखने वाली ट्रिक और रेल यात्रा... PM मोदी ने सुनाया मजेदार किस्सा

पीएम मोदी ने कहा कि जब वे छोटे थे और ट्रेन में सफर करते थे तो उन्हें सीट नहीं मिलती थी. तब रिजर्वेशन नहीं करा पाते थे और ट्रेन में बहुत भीड़ भी होती थी. ऐसी स्थिति में जब उन्हें मौका ठीक दिखाई देता था तो वह तुरंत लोगों का हाथ देखना शुरू कर देते थे.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 3:26 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 23 सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया. इस दौरान उन्होंने ज्योतिष अरिदमन नाम के क्रिएटर को अवॉर्ड देते हुए एक मजेदार किस्सा सुनाया.

पीएम मोदी ने कहा कि जब वे छोटे थे और ट्रेन में सफर करते थे तो उन्हें सीट नहीं मिलती थी. ट्रेन में बहुत भीड़ भी होती थी. ऐसी स्थिति में जब उन्हें मौका ठीक दिखाई देता था तो वह तुरंत लोगों का हाथ देखना शुरू कर देते थे.

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पीएम मोदी ने आगे कहा कि ज्योतिष ऐसी चीज है कि हर कोई अपना हाथ दिखाने के लिए तैयार हो जाता है. जब वह ज्योतिष की तरह हाथ देखने लगते थे तो तुरंत लोग उन्हें सीट दे देते थे. 

भारत मंडपम में हुआ आयोजन

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में इन्फ्लुएंसर्स को सम्मानित किया है. इस पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ स्टोरी टेलर अवॉर्ड सहित 20 श्रेणियों में दिया गया है. इनमें द डिसरप्टर ऑफ दि ईयर, सेलेब्रिटी क्रिएटर ऑफ दि ईयर, ग्रीन चैंपियन अवॉर्ड, बेस्ट क्रिएटर फॉर सोशल चेंज, मोस्ट इंपेक्टफुल एग्री क्रिएटर, कल्चरल एंबेस्डर ऑफ दि ईयर, इंटरनेशनल क्रिएटर अवॉर्ड, बेस्ट ट्रेवल क्रिएटर अवॉर्ड, स्वच्छता एंबेस्डर अवॉर्ड शामिल हैं.

इन कैटेगिरी में मिला अवॉर्ड

इसके अलावा इन्फ्लुएंसर्स को दि न्यू इंडिया चैंपियन अवॉर्ड, टेक क्रिएटर अवॉर्ड, हेरिटेज फैशन आइकन अवॉर्ड, मोस्ट क्रिएटिव क्रिएटर (मेल एंड फीमेल), बेस्ट क्रिएयर इन फूड कैटेगिरी अवॉर्ड, बेस्ट क्रिएटर इन एजुकेशन कैटिगरी, बेस्ट क्रिएटर इन गेमिंग कैटिगरी, बेस्ट माइक्रो क्रिएटर, बेस्ट नैनो क्रिएटर, बेस्ट हेल्थ एंड फिटनेस क्रिएटर की कैटिगरी में भी सम्मानित किया गया है.

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कल्चरल एंबेसडर ऑफ दि ईयर- मैथली ठाकुर

मैथिली ठाकुर का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. अपने दो छोटे भाइयों के साथ बिहार की मैथिली सोशल मीडिया पर भजन और लोकगीत गाती दिखती रही हैं. कम उम्र में ही संगीत और लोककला के प्रति उनके समर्पण ने सोशल मीडिया यूजर्स को प्रभावित किया और इसके जरिए ही थोड़ा ही सही, वे अपनी पारंपरिक जड़ों की ओर लौटने लगे. रॉक एंड पॉप म्यूजिक के इस दौर में मैथिली के गीत एक अलग ही सुकून देते हैं.

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