संसदीय पैनल के एजेंडे में टॉप पर दिल्ली-NCR का प्रदूषण, 4 दिसंबर को स्थायी समिति की बैठक में उठेगा मुद्दा

दिल्ली में नवंबर महीने में वायु गुणवत्ता अधिकांश समय 'बहुत खराब' श्रेणी में रही. इस दौरान कम से कम छह दिन 'गंभीर' और दो दिन 'गंभीर प्लस' श्रेणी में AQI दर्ज किया गया. शुक्रवार सुबह दिल्ली का AQI 329 दर्ज किया गया है.

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दिल्ली में प्रदूषण के मुद्दे पर संसद की स्थायी समिति करेगी बैठक दिल्ली में प्रदूषण के मुद्दे पर संसद की स्थायी समिति करेगी बैठक

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:39 PM IST

राष्ट्रीय राजधानी में एअर क्वालिटी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, संसद की स्थायी समिति (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन से संबंधित) ने अपने कार्यकाल 2024-25 के लिए जिन विषयों को चुना है, उनमें देश में प्रदूषण, विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर में वायु और जल प्रदूषण, प्राथमिकता में है. यह जानकारी राज्यसभा के ऑफिशियल बुलेटिन में दी गई है.

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4 दिसंबर को होगी बैठक
यह मुद्दा 4 दिसंबर को होने वाली समिति की बैठक में उठाया जाएगा. इस दौरान पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव समिति के सदस्यों को प्रदूषण पर उठाए गए कदमों और उनकी स्थिति पर जानकारी देंगे. दिल्ली में नवंबर महीने में वायु गुणवत्ता अधिकांश समय 'बहुत खराब' श्रेणी में रही. इस दौरान कम से कम छह दिन 'गंभीर' और दो दिन 'गंभीर प्लस' श्रेणी में AQI दर्ज किया गया. शुक्रवार सुबह दिल्ली का AQI 329 दर्ज किया गया, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार "बहुत खराब" श्रेणी में आता है.

जलवायु परिवर्तन से जुड़े अन्य विषयों पर भी होगी चर्चा
समिति जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जलवायु अनुकूल नई फसल प्रजातियों के विकास के विषय पर भी चर्चा करेगी. इसके अलावा, राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के योगदान, समुद्री प्रदूषण के प्रबंधन और न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में अनुसंधान कार्यों पर भी विचार किया जाएगा.
साथ ही, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के तहत आने वाले विभिन्न वैज्ञानिक संगठनों, प्रयोगशालाओं और संस्थानों की कार्यप्रणाली का भी परीक्षण किया जाएगा.

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यह समिति न केवल प्रदूषण की समस्या को समझने और समाधान निकालने पर जोर देगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों से निपटने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी.
 

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