प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने 19,744 करोड़ रुपये की लागत वाले नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण के दौरान नेशनल हाइड्रोजन मिशन का ऐलान किया था. इस प्रस्ताव को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट में मंजूरी दी गई.
इस मिशन के तहत सरकार का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने का है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का लक्ष्य रखा है. नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है.
इसके तहत सरकार का लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात में ग्लोबल हब बनाना है. इस मिशन से भारत को एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने और अर्थव्यवस्था के कई सेक्टर्स में डीकार्बनाइजेशन में मदद मिलेगी.
केंद्र सरकार के इस मिशन के तहत 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोन का उत्पादन किया जाएगा. इसके साथ ही इस क्षेत्र में कुल आठ लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. साथ में छह लाख से अधिक रोजगारों का सृजन किया जाएगा. जीवाश्म ईंधन के आयात में लगभग एक लाख करोड़ रुपये की कटौती की जाएगी.
ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने पर फोकस
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना है कि सरकार का लक्ष्य देश को ग्रीन हाइड्रोजन हब के तौर पर विकसित करने का है. इससे ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादक और उप्भोक्ता को एक ही जगह पर लाया जाएगा ताकि ट्रांसपोर्टेशन भी न बढ़े और जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर भी एक जगह उपलब्ध कराया जा सके.
ग्रीन हाइड्रोजन दरअसल एनर्जी का सबसे साफ सोर्स है. इससे प्रदूषण नहीं होता है. ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी बनाने के लिए पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है. इस प्रोसेस में इलेक्ट्रोलाइजर का उपयोग होता है.
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