प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से उसका पक्ष पूछा है. केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए फरवरी अंत तक का समय दिया गया है. मुस्लिम पक्षकारों ने कानून को चुनौती देने वालों की याचिकाओं का विरोध किया है. पक्षकारों ने कहा कि इस कानून को चुनौती नहीं दी जा सकती.
पक्षकारों का आरोप है कि केंद्र द्वारा जवाब में देरी के चलते ज्ञानवापी और मथुरा में यथास्थिति से छेड़छाड़ की कोशिश हो रही है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो याचिका के सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति पर सुनवाई के दौरान विचार करेगा.
क्या है प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट
पूजा स्थल अधिनियम (प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट) को संसद से 18 सितंबर, 1991 को पारित कर लागू किया गया था. प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 को कोई भी उपासना स्थल जिस स्थिति में जिसके पास है उसे भविष्य में कभी भी किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं तब्दील किया जा सकता है.
पुरातात्विक अवशेष और एएसआई की देखरेख वाली इमारतों को छूट
इससे छूट के लिए सिर्फ पुरातात्विक अवशेष और एएसआई की देखरेख वाली इमारतों या स्मारकों को रखा गया है. इस एक्ट के तहत विशिष्ट तौर पर सिर्फ राम मंदिर विवाद मामले को अलग रखा गया था.
काशी, मथुरा विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष इसी एक्ट की दलील देकर विरोध जता रहा है. जबकि इस एक्ट को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट इस एक्ट की वैधानिकता का परीक्षण कर रहा है.
संजय शर्मा