प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट: SC ने कहा-सरकार बताए अपना पक्ष

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से उसका पक्ष पूछा है. सरकार के पास जवाब दाखिल करने के लिए फरवरी अंत तक का समय है. मुस्लिम पक्षकारों ने कानून को चुनौती देने वालों की याचिकाओं का विरोध किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो याचिका के सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति पर सुनवाई के दौरान विचार करेगा.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 8:22 PM IST

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से उसका पक्ष पूछा है. केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए फरवरी अंत तक का समय दिया गया है. मुस्लिम पक्षकारों ने कानून को चुनौती देने वालों की याचिकाओं का विरोध किया है. पक्षकारों ने कहा कि इस कानून को चुनौती नहीं दी जा सकती.

Advertisement

पक्षकारों का आरोप है कि केंद्र द्वारा जवाब में देरी के चलते ज्ञानवापी और मथुरा में यथास्थिति से छेड़छाड़ की कोशिश हो रही है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो याचिका के सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति पर सुनवाई के दौरान विचार करेगा.

क्या है प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट
पूजा स्थल अधिनियम (प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट) को संसद से 18 सितंबर, 1991 को पारित कर लागू किया गया था. प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 को कोई भी उपासना स्थल जिस स्थिति में जिसके पास है उसे भविष्य में कभी भी किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं तब्दील किया जा सकता है.

पुरातात्विक अवशेष और एएसआई की देखरेख वाली इमारतों को छूट
इससे छूट के लिए सिर्फ पुरातात्विक अवशेष और एएसआई की देखरेख वाली इमारतों या स्मारकों को रखा गया है.  इस एक्ट के तहत विशिष्ट तौर पर सिर्फ राम मंदिर विवाद मामले को अलग रखा गया था.

Advertisement

काशी, मथुरा विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष इसी एक्ट की दलील देकर विरोध जता रहा है. जबकि इस एक्ट को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट इस एक्ट की वैधानिकता का परीक्षण कर रहा है. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement