भले ही समाज और सरकार की ओर से धर्म और जाति के भेदभाव को मिटाने की लाख बातें की जाती हो, लेकिन हकीकत तो यह है कि जाति को लेकर होने वाला भेदभाव कभी खत्म नहीं हो पाया है. ओडिशा के कोरापुट जिला से जातिवाद को लेकर भेदभाव का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है.
दरअसल, ओडिशा के कोरापुट जिले के बैरागी मूत ग्राम निवासी मंगला परजा को छोटी जाति होने की भयावह सजा मिली. मंगला ने अपनी मां की मौत पर अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों से मदद की गुहार लगाई. ग्रामीणों ने छोटी जाति का ताना देकर अंतिम संस्कार में मदद करने से इनकार कर दिया.
मंगला लाचार होकर मजबूरन पत्नी के साथ मिलकर अपनी मां कंधा दिया और अंतिम संस्कार किया. छह महीने पहले मंगला परजा ने गांव के पड़ोस में दूसरे जाति के घर में खाना खा लिया, जिसके बाद ग्रामीणों में मंगला परजा और उसके पूरे परिवार को गांव से बाहर कर दिया. परजा को गांव से बाहर रहने के कारण काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
मंगला ने आजतक को बताया कि दूसरे जाति के घर में खाना खाने के कारण हमें छोटी जाति बतलाकर गांव से बाहर कर दिया गया था, मेरी मां की मौत के बाद मैंने गांववालों से अंतिम संस्कार में मदद करने लिए गुहार लगाई, लेकिन लोगों ने छोटी जाति कह कर केवल ताना मारा और मदद करने से मुंह मोड़ लिया.
मंगला ने कहा कि मैंने और मेरी पत्नी ने मां के पार्थिव शरीर को कंधा दिया और श्मशान पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया. मंगला ने नम आंखों से कहा कि मुझे दूसरी जाति के घर में खाना खाने की भयावह सजा मिली है.
स्थानीय अंचल अधिकारी सुरेश पटनायक ने आजतक से कहा कि इस घटना की पूरी जानकारी अभी मेरे पास नहीं है, मुझे जानकारी मिली है कि मृतक महिला का बेटा मंगला परजा को समाज से बाहर किया गया था, स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर इसका हल निकला जाएगा, साथ ही प्रशासन की ओर से मंगला परजा को आर्थिक मदद प्रदान किया जाएगा.
मोहम्मद सूफ़ियान