कर्नाटक की मस्जिद में धार्मिक नारे लगाने के मामले में SC से राहत नहीं, कोर्ट ने कहा- अपनी बात राज्य सरकार को बताएं

कर्नाटक की एक मस्जिद परिसर में जय श्री राम का नारा लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली. जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता हैदर अली से कहा कि इस मामले में अदालत नोटिस जारी नहीं कर रही.

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सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 16 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:21 PM IST

कर्नाटक की एक मस्जिद परिसर में जय श्री राम का नारा लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली. जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता हैदर अली से कहा कि इस मामले में अदालत नोटिस जारी नहीं कर रही. आप अपनी बात राज्य सरकार को जाकर बताएं.

याचिकाकर्ता के वकील सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने दलील दी कि धार्मिक स्थल में घुसकर दूसरे धर्म के धार्मिक नारे लगाने से माहौल खराब होता है. लेकिन अदालत ने पूछा कि एक बयान और सीसीटीवी फुटेज में तो अभियुक्त के मस्जिद के आसपास नारे लगाने की बात सामने आ रही है. ऐसे विरोधाभास से शक शुबहा बढ़ता है. जांच भी खत्म हो गई है. अब क्या बचता है.

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याचिकाकर्ता ने कहा कि जांच मैंने नहीं को है. मैं तो शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता हूं. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि ये मामला धार्मिक विद्वेष बढ़ाने की श्रेणी में नहीं आता. पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी याचिका की प्रति कर्नाटक सरकार को देने को कहा है. कोर्ट अब दो हफ्ते बाद सुनवाई करेगा.

17 दिसंबर को हो सकती है SC कॉलेजियम की बैठक
उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर यादव के कथित विवादित बयान के मुद्दे पर देश के मुख्य न्यायधीश जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाला कॉलेजियम इस मामले में मंगलवार को सुनवाई कर सकता है. सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में शीतकालीन छुट्टियों से पहले यानी 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विचार विमर्श करेगा. उस बैठक में कॉलेजियम के समक्ष जस्टिस यादव भी पेश होंगे और सवालों के जवाब देंगे.

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सुप्रीम कोर्ट में उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कॉलेजियम की बैठक मूल रूप से सप्ताह के अंत के लिए निर्धारित थी. लेकिन कॉलेजियम के पांच सदस्यों में से दो की अनुपलब्धता के कारण पिछले सप्ताहांत उसे स्थगित कर दिया गया था. अब यह बैठक मंगलवार 17 दिसंबर को होने की संभावना है.

इससे पहले 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बयान से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी थी. सूत्रों के मुताबिक, बैठक का उद्देश्य कॉलेजियम द्वारा किसी भी कार्रवाई पर विचार करने से पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने की अनुमति देकर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को संतुष्ट करना है.

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