नेवी चीफ ने की पी-8आई विमान और प्रीडेटर ड्रोन की तारीफ, बोले- इनसे रक्षाबलों को मिली मजबूती

लद्दाख के आउटरीच कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि नौसेना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी गांवों और जिलों से कम से कम एक व्यक्ति नौसेना में होना चाहिए. भारतीय नौसेना के लाइन प्रीडेटर और पी-8आई सर्विलांस विमानों ने लद्दाख में ऑपरेशन में अच्छा प्रदर्शन किया है.

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नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार आउटरीच कार्यक्रम में शामिल हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार आउटरीच कार्यक्रम में शामिल हुए

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

पी-8आई विमान और प्रीडेटर ड्रोन भारतीय नौसेना के लिए काफी लाभदायक साबित हो रहे हैं. यही कारण है कि नेवी चीफ ने इन्हें तीनों सेनाओं द्वारा आवश्यकता के अनुसार इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है. नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने गुरुवार को कहा कि भारतीय नौसेना के लाइन प्रीडेटर और पी-8आई सर्विलांस विमानों ने लद्दाख में ऑपरेशन में अच्छा प्रदर्शन किया है. ऐसे हथियारों का इस्तेमाल तीनों सेनाओं द्वारा आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए.

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लद्दाख के आउटरीच कार्यक्रम में कुमार ने आजतक से कहा कि नौसेना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी गांवों और जिलों से कम से कम एक व्यक्ति नौसेना में होना चाहिए. लद्दाखी राजधानी तक पहुंचने के लिए ज़ोजिला दर्रे से होते हुए 14 घंटे की सड़क मार्ग से लेह की यात्रा करने के बाद उन्होंने युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

प्रीडेटर ड्रोन से रक्षाबलों को मिली मजबूती

उन्होंने बताया कि प्रीडेटर और पी-8आई ने सैन्य गतिरोध के दौरान अच्छा काम किया. यह स्पष्ट करते हुए कि प्रीडेटर ड्रोन रक्षा बलों को मजबूत क्षमता प्रदान करते हैं, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि ड्रोन लगातार 30 से अधिक घंटों तक उड़ान भर सकते हैं और देश के हित के बड़े क्षेत्रों को कवर कर सकते हैं. 

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2020 में लीज पर लिए थे दो ड्रोन

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना इन ड्रोनों का संचालन कर रही है. वे हेल (उच्च ऊंचाई वाले लंबे सहनशक्ति वाले ड्रोन) की श्रेणी में आते हैं. इसलिए, हमने महसूस किया कि बेहतर निगरानी और समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के लिए इन ड्रोनों की आवश्यकता है. इसलिए हमने इनमें से दो को नवंबर 2020 से लीज पर ले लिया था. और तब से हम इसका संचालन कर रहे हैं.

'बड़े क्षेत्रों को कवर करने में मिल रही मदद'

नेवी चीफ ने कहा कि हमने 12,000 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भरी है. हमने इसके लाभों को समझा है और यह हमें बड़े क्षेत्रों को कवर कर सकता है. हिंद महासागर क्षेत्र की रक्षा के लिए, आपको विभिन्न आवश्यकताओं के लिए 2500 से 3000 मील तक जाना होता है. जैसे कि यह जानना कि इन पानी में कौन काम कर रहा है, वे वहां क्यों हैं और वे वहां क्या कर रहे हैं. ऐसे में ये ड्रोन काफी मददगार साबित हो रहे हैं.

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