स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने शनिवार को पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) को जारी किया, जिसमें भारत और इसके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जनसंख्या, स्वास्थ्य और पोषण के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है. इस सर्वे के मुताबिक, देश की शिशु मृत्यु दर (Mortality Rate) में कमी देखने को मिली है, लेकिन कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है.
वहीं, 2019-20 के सर्वे के अनुसार 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में NFHS-4 की तुलना में कुल आबादी का लिंगानुपात यानी प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाएं, बढ़ गया है. हालांकि हिमाचल, अंडमान निकोबार, जम्मू-कश्मीर, केरल और लद्दाख में लिंगानुपात कम हुआ है.
NFHS-5 के अनुसार, देश के 18 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां शिशु मृत्यु दर और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है. इस बाबत स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हेल्थ सर्विस और वैक्सिनेशन में सुधार मृत्यु दर में कमी का कारण है.
बात अगर कुपोषण की करें तो 18 राज्यों में से 11 राज्यों में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ी है, जिनका वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम है और इसका एक मुख्य कारण कुपोषण है. तेलंगाना में ऐसे बच्चों की संख्या में सबसे अधिक 5.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि हिमाचल में 4.5 और केरल में 3.7 फीसदी का इजाफा हुआ है.
देखें: आजतक LIVE TV
NFHS-5 सर्वे के मुताबिक, बिहार, हिमाचल, असम, केरल, मिजोरम, नगालैंड, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे हिस्सों में पांच साल से कम उम्र के कमजोर बच्चों का प्रतिशत बढ़ गया, जबकि पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में यह प्रतिशत पहले जैसा ही है.
NFHS-5 सर्वे में ये भी सामने आया है कि पांच साल के कम उम्र के बच्चों में एनीमिया यानी कि खून की कमी की समस्या बढ़ी है. असम में ये समस्या ज्यादा है, यहां करीब 68 प्रतिशत बच्चों को एनीमिया है.
ये भी पढ़ें-
aajtak.in