देश के अलग-अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा के बीच मुस्लिम समुदाय की बड़ी संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ा अधिवेशन बुलाया है, जिसमें समाज के प्रतिष्ठित उलेमा और नुमाइंदे यूनिफॉर्म सिविल कोड समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे और प्रस्ताव पास करेंगे.
दिल्ली में 11 और 12 फरवरी को होने वाले अधिवेशन में धार्मिक आजादी और मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ-साथ मदरसों की स्वायत्तता, सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों के लिए आरक्षण देने संबंधी प्रस्ताव भी लाया जा जाएगा. इसके साथ ही राष्ट्रीय एकता और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर महत्वपूर्ण बहस और प्रस्ताव भी इस अधिवेशन में लाए जाएंगे. जमीयत की इस बैठक में हेट स्पीच और मुसलमानों के खिलाफ हो रही बयानबाजी पर भी प्रस्ताव लाया जाएगा.
जमीयत के 34वें अधिवेशन में मजहबी भाईचारे को मजबूत करने को लेकर उठाए जा रहे कदमों और शुरू किए जा रही तमाम पहल की बात भी होगी. बुलाए गए अधिवेशन के नोट के मुताबिक, मौजूदा हालात में सामाजिक ताने-बाने के बीच बढ़ती दूरी और आक्रामकता से फैल रहे हेट कैंपेन को रोकने और भाईचारे को मजबूत करने की पहल भी की जाएगी.
100 साल पुराना है जमीयत उलेमा-ए हिंद संगठन
जमीयत उलेमा-ए-हिंद मुसलमानों का 100 साल पुराना संगठन है. जमीयत मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन होने का दावा करता है. इसके एजेंडे में मुसलमानों के राजनीतिक-सामाजिक और धार्मिक मुद्दे रहते हैं. ये संगठन इस्लाम से जुड़ी देवबंदी विचारधारा को मानता है. देवबंद की स्थापना साल 1919 में तत्कालीन इस्लामिक विद्धानों ने की थी. इनमें अब्दुल बारी फिरंगी महली, किफायुतल्लाह देहलवी, मुहम्मद इब्राहिम मीर सियालकोटी और सनाउल्लाह अमृतसरी थे.
देश के बंटवारे का किया था विरोध
अंग्रेजी राज में जमीयत कांग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर खिलाफत आंदोलन में शामिल हुआ था. इसके अलावा इसने देश के बंटवारे का भी विरोध किया और भारत की संयुक्त सांस्कृतिक विरासत की पैरवी की. हालांकि देश के बंटवारे के दौरान इस स्टैंड की वजह से जमीयत में बंटवारा हो गया और जमीयत उलेमा ए इस्लाम नाम का एक नया संगठन बना जो पाकिस्तान बनने का समर्थन कर रहा था.
मुसलमानों के अधिकारों की पैरवी करता है संगठन
जमीयत उलेमा-ए-हिंद मुसलमानों के नागरिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकारों को भी संरक्षित करने का काम करता है. इसके अलावा जमीयत मुस्लिम समाज में जरूरी शैक्षणिक और सामाजिक सुधार को भी बढ़ावा देता है. जमीयत मुस्लिम समुदाय के लोगों को अलग अलग कानूनी मुद्दों पर मदद मुहैया कराता है.
आशुतोष मिश्रा