मेरठ शहर में पहली बार मेरठ मेट्रो का ट्रायल रन शुरू हुआ, जिससे मेट्रो परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है. यह ट्रायल रन एनसीआरटीसी द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें मेरठ साउथ से लेकर मेरठ सेंट्रल स्टेशन के पहले तक विभिन्न गति पर मेट्रो ट्रेनों का परीक्षण किया गया. इस प्रक्रिया का उद्देश्य ट्रैक और ट्रैक्शन के साथ-साथ ट्रेन कंट्रोल मैनेजमेंट सिस्टम (टीसीएमएस) का भी आकलन करना है.
ट्रायल रन के दौरान, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विभिन्न परीक्षण किए जाते हैं, जिसमें सैंडबैग के जरिए वजन परीक्षण और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है. इसके अतिरिक्त, यात्रियों के लिए आराम का मूल्यांकन और समग्र सहूलियत भी सुनिश्चित की जाती है.
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इस दौरान ट्रेनों को उचित गति पर विभिन्न मोड़ों पर चलाया जाता है, ताकि राइडिंग कम्फर्ट की पुष्टि हो सके. साथ ही, ट्रेनों का सिग्नलिंग सिस्टम, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (पीएसडी) और ओवरहेड सप्लाई सिस्टम जैसी उप-प्रणालियों के साथ समन्वय का भी परीक्षण किया जाता है.
10 ट्रेनसेट दुहाई स्थित डिपो में पहुंच चुके हैं
मेरठ मेट्रो के लिए 12 ट्रेनसेट को गुजरात के सावली स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में निर्मित किया गया है, जिनमें से 10 ट्रेनसेट दुहाई स्थित डिपो में पहुंच चुके हैं. इन ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा और आराम को ध्यान में रखते हुए वातानुकूलित व्यवस्था, सामान रखने की रैक, यूएसबी चार्जिंग सुविधाएं जैसी सुविधाएं दी गई हैं.
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18 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 5 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत
मेरठ मेट्रो कॉरिडोर कुल 23 किलोमीटर का है, जिसका 18 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 5 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत है. कुल 13 स्टेशनों का निर्माण हो रहा है, जिसमें मेरठ सेंट्रल, भैंसाली, और बेगमपुल भूमिगत होंगे. एनसीआरटीसी का उद्देश्य इस वर्ष में मेट्रो संचालन को जनता के लिए चालू करना है, जो कि मेरठ के यात्रियों के लिए एक बड़ी सुविधा होगी.
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