मुर्दाघर ले जाने से ठीक पहले 'जिंदा' हो उठा व्यक्ति, एक दिन पहले ही अखबार में छपी थी 'श्रद्धांजलि'

केरल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां 'मृत' मान लिए गए व्यक्ति को अचानक होश आ गया. न्यूज पेपर में मंगलवार को पवित्रन का 'श्रद्धांजलि' प्रकाशित किया गया था. जिसके बाद कई लोग उनके कथित निधन पर संवेदना व्यक्त करने के लिए उनके घर पहुंचे.

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यह AI जेनरेटेड तस्वीर है. इसका इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है. यह AI जेनरेटेड तस्वीर है. इसका इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है.

aajtak.in

  • कन्नूर (केरल),
  • 15 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 5:09 PM IST

केरल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां 'मृत' मान लिए गए व्यक्ति को अचानक होश आ गया. यह घटना कन्नूर के एकेजी कोऑपरेटिव हॉस्पिटल में हुई. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मृत मान लिए गए बुजुर्ग व्यक्ति के शव को मोर्चरी हाउस ले जाया जा रहा था, ले जाने से ठीक पहले चमत्कारिक रूप से उसे होश आ गया. कन्नूर जिले के पचापोईका के रहने वाले 67 साल के पवित्रन के फिर से 'जिंदा' होने से परिवार के साथ इलाके के लोग हैरान हैं. पचापोईका के अंतिम संस्कार की व्यवस्था कर दी गई थी, लेकिन इसके ठीक पहले वह जीवित हो गए. यही नहीं लोकल न्यूज पेपर में मंगलवार को पवित्रन का 'श्रद्धांजलि' प्रकाशित किया गया था. जिसके बाद कई लोग उनके कथित निधन पर संवेदना व्यक्त करने के लिए उनके घर पहुंचे.

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मुर्दाघर में तैयार किया गया था फ्रीजर
शव को अस्थायी रूप से रखने के लिए रिश्तेदारों के अनुरोध पर यहां AKG मेमोरियल को-ऑपरेटिव हॉस्पिटल के मोर्चरी में एक फ्रीजर तैयार किया गया था. हालांकि, 'डेड बॉडी' को शवगृह में ले जाने से ठीक पहले अस्पताल के कर्मचारी ने उसकी उंगलियों में हल्की हरकत देखी और तुरंत पवित्रन के रिश्तेदारों और डॉक्टरों को बताया. अस्पताल के एक अटेंडेंट जयन ने कहा कि उसने पवित्रन की उंगलियों को हिलते हुए देखा.

अस्पताल के अधिकारियों ने पुष्टि की कि पवित्रन को तुरंत ICU में ले जाया गया. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पवित्रन हृदय और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे और उनका कर्नाटक के मंगलुरु में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. 

परिवार घर लाने की कर रहा था प्लानिंग
हालांकि, अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था, लेकिन इलाज में ज्यादा खर्च के कारण परिवार ने कथित तौर पर उन्हें सोमवार को उनके गृहनगर वापस लाने का फैसला किया. रिश्तेदारों ने कहा कि मंगलुरु के डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि वेंटिलेटर सपोर्ट के बिना पवित्रन जीवित नहीं रह पाएंगे और अगर इसे हटा दिया गया तो 10 मिनट के भीतर उनकी मृत्यु हो जाएगी. 

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पारिवारिक सूत्रों ने दावा किया कि अस्पताल से भेजे जाने के बाद उन्होंने अपनी आंखे नहीं खोली थीं और उनका ब्लडप्रेशर बहुत कम था. उनके निधन के अनुमान को सही ठहराते हुए परिवार ने बताया कि मंगलुरु के डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि वेंटिलेटर के बिना एक साधारण एम्बुलेंस में पांच घंटे से अधिक की यात्रा में उनके बचने की संभावना नहीं है. 

अंतिम संस्कार की हो गई थी व्यवस्था
रिश्तेदारों ने कहा कि यात्रा के दौरान पवित्रन के शरीर में कोई हलचल नहीं दिखी और उनमें जीवन के कोई लक्षण नहीं दिखे. पवित्रन की पत्नी और बहन एम्बुलेंस में उनके साथ थीं, जबकि अन्य रिश्तेदार कार में उनके पीछे-पीछे आए. रात में पहुंचने पर परिवार उनके 'शव' को मोर्चरी में रखने के लिए AKG अस्पताल लाया और मंगलवार के लिए अंतिम संस्कार की व्यवस्था की. 

ब्लड प्रेशर सामान्य मिला
अस्पताल के अटेंडेंट जयन ने बुधवार को पत्रकारों के साथ अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने कहा, 'मेरे अलावा, हमारे इलेक्ट्रीशियन अनूप भी वहां थे. उन्होंने देखा कि व्यक्ति की उंगलियां हिल रही थीं और उन्होंने मुझे बुलाया. मैंने भी देखा. हमने तुरंत रिश्तेदारों और डॉक्टरों को सूचित किया. जब मरीज का ब्लड प्रेशर जांचा गया, तो यह सामान्य था. 

AKG मेमोरियल अस्पताल के अधिकारियों ने बुधवार को पुष्टि की कि पवित्रन अभी भी ICU में हैं और इलाज के दौरान उनमें सुधार दिख रहा है. जब उनका नाम पुकारा जाता है तो वे अपनी आंखें खोल रहे हैं और लोगों को देख रहे हैं. हालांकि उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

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