'हम मानहानि के आरोपों का सही तरीके से बचाव...', ममता के वकील ने साधा राज्यपाल पर निशाना

संजय बसु ने कहा कि राज्यपाल की ओर से दायर मानहानि का मुकदमा भी उनके द्वारा अन्य राजनीतिक मुद्दों को उठाने का प्रयास लगता है, जैसे कि मानहानि की आड़ में हाल ही में निर्वाचित विधानसभा सदस्यों को अध्यक्ष के समक्ष शपथ लेने से मना करना. उन्होंने कहा कि हम इन आरोपों का उचित तरीके से बचाव करेंगे.

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ममता बनर्जी और सीवी आनंद बोस (Credits: PTI) ममता बनर्जी और सीवी आनंद बोस (Credits: PTI)

सूर्याग्नि रॉय

  • कोलकाता,
  • 03 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने 28 जून को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था. इससे एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने दावा किया था कि महिलाओं ने उनसे शिकायत की थी कि राजभवन में होने वाली गतिविधियों के कारण वे वहां जाने से डरती हैं.

राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे को जस्टिस कृष्ण राव की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था.

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हालांकि कलकत्ता हाईकोर्ट ने मानहानि के मुकदमे की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी. स्थगन के बाद ममता बनर्जी के कानूनी वकील संजय बसु ने इंडिया टुडे से विशेष बातचीत की और राज्यपाल पर निशाना साधा.

संजय बसु ने कहा कि राज्यपाल की ओर से दायर मानहानि का मुकदमा भी उनके द्वारा अन्य राजनीतिक मुद्दों को उठाने का प्रयास लगता है, जैसे कि मानहानि की आड़ में हाल ही में निर्वाचित विधानसभा सदस्यों को अध्यक्ष के समक्ष शपथ लेने से मना करना. उन्होंने कहा कि हम इन आरोपों का उचित तरीके से बचाव करेंगे.

संजय बसु ने कहा कि हमें पता चला है कि तृणमूल प्रमुख के कथित बयानों पर मुख्यमंत्री और अन्य के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं राजभवन में असुरक्षित महसूस करती हैं. उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं के बाद महिलाओं ने राजभवन से संबंधित आरोपों के साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क किया है, महिलाओं की पीड़ा को व्यक्त करना उचित होगा, खासकर तब जब मुख्यमंत्री खुद एक महिला हैं. 

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बता दें कि राज्य सचिवालय में एक प्रशासनिक बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने 27 जून को कहा था कि महिलाओं ने मुझे बताया है कि वे हाल ही में हुई घटनाओं के कारण राजभवन जाने से डरती हैं. बनर्जी की टिप्पणी के बाद राज्यपाल ने कहा था कि जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे गलत और बदनामी वाली धारणा न बनाएं. राज्यपाल बोस ने ममता के आरोपों के बाद हाईकोर्ट का रुख किया. 

वहीं, 2 मई को राजभवन की एक संविदा महिला कर्मचारी ने राज्यपाल बोस के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने जांच शुरू की. उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत किसी राज्यपाल के विरुद्ध उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती. 

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