केरल के पश्चिमी घाट को हो रहा नुकसान, तत्काल कार्रवाई के लिए सीएम को दिया ज्ञापन

लंदन में ‘ब्रिटेन-केरल बिजनेस फोरम और फ्रेंड्स ऑफ केरल एमपीज’ ने केरल सरकार से पश्चिमी घाट को हुए नुकसान को कम करने के लिए कार्रवाई करने को कहा, जिसकी वजह से वहां साल 2016 से ही लगातार बाढ़ आ रही है.

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केरल सीएम से पश्चिमी घाट की पड़ाड़ियों को हुए नुकसान को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया केरल सीएम से पश्चिमी घाट की पड़ाड़ियों को हुए नुकसान को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST
  • पश्चिमी घाट की पड़ाड़ियों को हुआ नुकसान
  • घाटों को उनकी पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए कहा गया
  • मॉनसून को प्रभावित करते हैं ये घाट

लंदन में ‘ब्रिटेन-केरल बिजनेस फोरम और फ्रेंड्स ऑफ केरल एमपीज’ ने केरल सरकार (Kerala Government) से कहा है कि वह पश्चिमी घाट की पड़ाड़ियों को हुए नुकसान को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करे, जिसकी वजह से वहां साल 2016 से ही लगातार बाढ़ आ रही है.

पश्चिमी घाटों को उनकी पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए, फोरम ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Kerala CM Pinarayi Vijayan) को कार्रवाई करने के लिए ज्ञापन सौंपा है.

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पर्यावरण संरक्षण हो हमारा तात्कालिक उद्देश्य

ब्रिटेन-केरल बिजनेस फोरम के संरक्षक और इंडो-ब्रिटिश ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के अध्यक्ष, सांसद वीरेंद्र शर्मा ने कहा, "जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई करना विकल्प नहीं बल्कि यह हमारी ज़रूरत है. हमने लंबे समय इस ग्रह की उपेक्षा की है और आज हम अपने इसी व्यवहार की कीमत चुका रहे हैं."

उन्होंने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित करना हमारा तात्कालिक उद्देश्य होना चाहिए. केरल एक खूबसूरत जगह है, जिसे हमें अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसे ही बनाए रखने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए, ताकि वे भी इस जगह के प्राकृतिक वैभव को देख सकें.

पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखलाएं मॉनसून को नियंत्रित करती हैं

पश्चिमी घाट वह पर्वत श्रृंखलाएं हैं जो भारत के पश्चिमी तट तक लगी हुई हैं और केरल की जलवायु में अहम भूमिका निभाती हैं. यह गर्मियों के बाद, दक्षिण-पश्चिम से आने वाली नमी से भरी मानसूनी हवाओं को रोककर केरल के मौसम के मिजाज को प्रभावित करती हैं.

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पश्चिमी घाट का अगला हिस्सा केरल के दक्षिणी हिस्से में है. मॉनसून जून के पहले सप्ताह में केरल से टकराता था, फिर धीरे-धीरे तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र की तरफ व्यवस्थित तरीके से चलता था. यह घनी हरी-भरी पर्वत श्रृंखला ही मॉनसून को नियंत्रित करती थी.

वनों की कटाई की वजह से, पश्चिमी घाट का प्रभाव कम हो गया है, जिससे मानसून का पैटर्न अनिश्चित हो गया है.

केरल में सरकारों ने कई पर्यटन परियोजनाओं सहित निर्माण परियोजनाओं को अनुमति दी जिसकी वजह से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की गई. केरल के इडुक्की जिले के मुन्नार में ही अकेले करीब 1,000 होटल हैं.

मलयाली समुदाय से संबंध रखने वाले और ईस्ट हैम के सांसद स्टीफन टिम्स ने कहा, ''केरल की सुंदरता दुनिया भर में लोकप्रिय है, और मैंने खुद केरल की पहाड़ियों की यात्रा की है. राज्य जलवायु परिवर्तन के प्रति बहुत संवेदनशील है. ग्लासगो में दुनिया के नेता वैश्विक उपाय के लिए मिले हैं, मैं उम्मीद करता हूं कि वहां पर राज्य अधिकारियों द्वारा भी पर्यावरण चुनौतियों के लिए प्रभावी उपाय होगा."

स्कॉटिश नेशनल पार्टी के सांसद मार्टीन डे ने कहा, "वनों की कटाई एक ऐसी चीज है जिससे निपटने में हम सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए. भविष्य के लिए वृक्षारोपण एक बहुत ही सकारात्मक कदम है जो स्कॉटलैंड ने हालिया वर्षों में करके दिखाया है. मैं सभी देशों को और अधिक वृक्षारोपण करने के लिए प्रोत्साहित करूंगा.'' मार्टीन डे ने 2018 में सबसे भीषण बाढ़ के बाद केरल के मुख्यमंत्री राहत कोष का समर्थन किया और धन जुटाया था. 

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ज्ञापन में केरल सरकार से कर्नाटक राज्य द्वारा अनुमोदित प्रस्तावित रेलवे लाइन परियोजना सहित पश्चिमी घाट के सभी हिस्सों में सभी निर्माण परियोजनाओं को रोकने के लिए पड़ोसी राज्य सरकारों पर दबाव डालने का भी आग्रह किया गया है.


 

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