करगिल युद्ध: सबक और सीख जिसने भारत की दिशा हमेशा के लिए बदल दी

करगिल युद्ध में भारत की जीत हुई...सभी को उस पर गर्व भी है. लेकिन इस युद्ध का एक पहलू ये भी है कि इसने भारत की दिशा और नीति हमेशा के लिए बदल दी. कई ऐसे सबक दिए गए जो कभी भारत नहीं भूलने वाला है.

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करगिल युद्ध करगिल युद्ध

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST
  • भारत को मिला आत्मनिर्भरता का मंत्र
  • पाकिस्तान पर कभी भरोसा ना करने की सीख

1999 में पाकिस्तान ने करगिल की चोटियों पर कब्ज़ा कर लिया था. उन चोटियों को पाकिस्तानी कब्ज़े से छुड़ाने के लिए एक युद्ध छिड़ा जिसमें भारत ने ना सिर्फ एक बड़ी जीत दर्ज की बल्कि पाकिस्तान को भी एक ऐसा संदेश दिया गया जो वो कभी नहीं भूला. इसके साथ-साथ करगिल के उस एक युद्ध ने भारत को भी कई सीख और सबक दे दिए. कई ऐसे पाठ पढ़ा दिए गए जिसने भारत की आने वाले सालों के लिए दिशा और नीति बदल दी.

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सीख नंबर 1

करगिल युद्ध की पहली बड़ी सीख थी कि पाकिस्तान पर कभी भरोसा ना किया जाए. करगिल युद्ध से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती की कोशिशें हो रही थीं. करगिल में घुसपैठ भारत के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात था. यही वजह है कि भारत...कभी...पाकिस्तान पर.. भरोसा नहीं करता. पाकिस्तान का जो हाल 1999 में था.. वही आज भी है.. पाकिस्तान की हरकतों में कोई बदलाव नहीं आया.

सीख नंबर 2

करगिल युद्ध की दूसरी बड़ी सीख थी युद्ध को जितना जल्दी हो सके खत्म किया जाए. करगिल युद्ध 84 दिनों तक चला जिसमें बड़ी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ और काफी खर्च आया. हमने इस युद्ध में सैकड़ों सैनिकों की शहादत देखी. तो सवाल ये है कि क्या ये युद्ध 84 दिन के बजाए 8 दिन में खत्म हो सकता था? जिस तरह भारत को 527 सैनिकों का नुकसान हुआ... हमारे वीर जवानों को बलिदान देना पड़ा... क्या वो कम हो सकता था. यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध भी लंबा खिंच गया.. और रूस को न चाहते हुए भी बहुत नुकसान उठाना पड़ा. इससे ये पता चलता है कि भविष्य में जो युद्ध होंगे, उनमें जीत उसी देश की होगी, जिसमें जल्दी युद्ध खत्म करने की क्षमता हो .कम समय में ज़्यादा मारक शक्ति और कम से कम नुकसान ही जीत का मंत्र है.

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सीख नंबर 3

करगिल युद्ध की तीसरी बड़ी सीख थी सैन्य आत्मनिर्भरता. ये सीख करगिल युद्ध के दौरान हुई एक छोटी सी घटना ने बताई. ये घटना GPS लोकेशन से जुड़ी हुई थी. वर्ष 1973 से ही भारतीय सेना...अमेरिकी GPS सिस्टम का इस्तेमाल कर रही थी. लेकिन करगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तानी सैनिकों की लोकेशन देने से इनकार कर दिया था. ये सबसे बड़ी सीख थी कि युद्ध के दौरान, अपने बनाए हुए स्वदेशी हथियार और तकनीक होना जरूरी है. भारत ने उस जरूरत को पूरा करते हुए अपना नैविगेशन सिस्टम बना लिया. इसे नाविक के नाम से भी लोग जानते हैं. सिर्फ यही नहीं  हथियारों के क्षेत्र में भी  भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ गया है. अब स्वदेशी हथियार और हथियारों के महत्वपूर्ण पुर्जे  दूसरे देशों को Export किए जा रहे हैं. आज भारत का Defence Export 13 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. 

यही नहीं भारत ने फिलीपीन्स के साथ अपनी स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल की डील फाइनल की है. और भारत पांचवीं जेनेरेशन के फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने की प्लानिंग कर रहा है. इसे AMCA यानी Advanced medium combat aircraft कहा जा रहा है. ये एयरक्राफ्ट रफाल से भी ज्यादा आधुनिक होंगे.

सीख नंबर 4

करगिल युद्ध ने भारत को ये भी सिखाया कि भविष्य में भारत पर दो तरफा युद्ध लड़ने का दबाव बन सकता है. करगिल क्षेत्र, लद्दाख में पड़ता है. भारत ये मानता आ रहा था कि पाकिस्तान की लद्दाख में कोई खास दिलचस्पी नहीं है. और चीन भी लद्दाख के प्रति उदासीन है.. लेकिन करगिल युद्ध के बाद भारत ने जम्मू कश्मीर ही नहीं, लद्दाख के मोर्चे पर भी युद्ध की तैयारी शुरू कर दी. ये दो मोर्चे की लड़ाई है.. यानी भारत के खिलाफ चीन और पाकिस्तान एक साथ युद्ध का एलान करते हैं तो देश को दो मोर्चों पर युद्ध लड़ना होगा.

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करगिल युद्ध के बाद बड़े परिवर्तन

अब ये तो सबक हैं जो भारत ने करगिल युद्ध से लिए हैं. लेकिन कई बड़े परिवर्तन भी देखने को मिल गए हैं. सबसे बड़ा तो आत्मनिर्भता की ओर बढ़ना है. स्वदेशी हथियार और स्वदेशी तकनीक किसी युद्ध में जीत का सबसे बड़ा आधार बनती हैं. अमेरिका, फ्रांस, चीन या रूस ये सभी देश महाशक्तियां इसलिए कही जाती हैं, क्योंकि ये अपनी सुरक्षा के लिए खुद के बनाए हथियारों पर भरोसा करते हैं. यही नहीं ये देश अपने यहां हथियारों की नई रिसर्च पर भी काम करते हैं.

भारत को भी समय के साथ ये बात समझ में आई. भारत ने स्वदेशी हथियार बनाने पर जोर दिया है. भारतीय हथियारों की मांग भी लगातार बढ़ी है. वर्ष 2017 से लेकर 2021 तक भारत ने कई देशों को हथियार या उससे जुड़ी महत्वपूर्ण चीजें Export की हैं. SIPRI का का डेटा बताता है कि भारत.. पिछले 5 वर्षों में 8 देशों को डिफेंस से जुड़ी बहुत चीजें Export कर चुका है. और साल दर साल भारत से हथियार खरीदने वाले देशों की संख्या और भारतीय हथियारों में उनकी दिलचस्पी बढ़ी है. वर्ष 2017 से 2021 के बीच भारत से हथियार खरीदने वाले देशों में अर्मेनिया, बांग्लादेश, मॉलदीव्स, मॉरिशस,मोजाम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, श्रीलंका औऱ फिलीपीन्स हैं. भारत...फिलीपीन्स को अगले 18 महीने में ब्रह्मोस मिसाइल दे देगा. और 2021-22 का हिसाब लगाएं तो भारत अब तक 13 हज़ार करोड़ रुपये के हथियार बेच चुका है.

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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

यही नहीं भारत जल्दी ही रूस के साथ मिलकर अमेठी में 5 लाख AK-203 एसॉल्ट राइफल भी बनाने जा रहा है. जो डिफेंस सेक्टर में भारत पर दूसरे देशों के भरोसे का प्रमाण भी है. भारत के स्वदेशी हथियारों की एक लंबी लिस्ट है, जो समय समय पर भारतीय सेना में शामिल किए जा रहा है. इसमें फाइटर एयरक्राफ्ट भी हैं, और टैंक भी. हम आपको कुछ स्वदेशी हथियारों के बारे बताते हैं. इनमें से कुछ हथियारों को भारतीय सेना में शामिल किया गया है. और कुछ को जल्दी ही शामिल कर लिया जाएगा. भारतीय वायुसेना में Light Combat Aircraft तेजस.. और फाइटर हेलीकॉप्टर शामिल किए गए हैं. इसके अलावा अरुद्रा और अश्लेषा राडार सिस्टम, अस्त्र और आकाश मिसाइलें भी शामिल की गई हैं. पिछले साल 14 फरवरी को स्वदेशी अर्जुन टैंक को भी सेना में शामिल किया गया था. भारतीय नौसेना को पिछले साल नवंबर में Advanced Electronic Warfare System 'शक्ति' दिया गया था. स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत को इसी साल अगस्त में नौसेना को सौंपा जाना है.

आजतक ब्यूरो

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