जम्मू-कश्मीर के पुंछ में किस तरह हुआ आतंकी हमला?

G20 समिट की तैयारियों के बीच जम्मू कश्मीर के पुंछ में किस तरह हुआ आतंकी हमला, असम-अरुणाचल के बीच सीमा विवाद क्या वाकई सुलझ गया है और रॉबर्ट एफ. केनेडी की अमेरिकी चुनाव में एंट्री क्या बाइडेन के लिए भारी पड़ सकती है? सुनिए 'आज का दिन' में.

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शुभम तिवारी

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  • 21 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 10:14 AM IST

कल दोपहर के करीब जम्मू-कश्मीर के पुंछ से ख़बर आई कि इंडियन आर्मी की गाड़ी में आग लग गई है. और इसमें 5 जवान शहीद हो गए हैं, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज सेना अस्पताल में चल रहा है. शुरू में ये सेना की गाड़ी किसी दुर्घटना का शिकार हुई है. लेकिन शाम आते आते जिस तरह के डिटेल्स उस से जुड़े आने लगे, ये स्पष्ट हो गया था कि ते एक आतंकी हमला है. न सिर्फ़ सेना ने इसकी पुष्टि की. आतंकी संगठन PAFF यानी पीपल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट ने इस हमले की जिम्मेदारी भी ले ली. ये हमला ऐसे समय में हुआ है जब इसी साल जनवरी-फरवरी के दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आर्मी यूनिट्स को एक एडवाइजरी जारी की थी. इसमें उसने बताया था कि आने वाले दिनों में बॉर्डर से घुसपैठ बढ़ने की आशंका है. और वजह है कश्मीर में होने वाले G-20 समिट की बैठक. कल ये आतंकी हमला किस तरह हुआ, अब तक पुख़्ता तौर पर क्या डिटेल्स हैं, आतंकियों के बारे में कुछ ठोस और जानकारी है क्या, कहाँ से आए, किस तरह से जवाबी कार्रवाई हुई? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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कल नई दिल्ली में एक समझौता हुआ जिसे ऐतिहासिक कई मायनों में भारत सरकार ने कहा. नए करार के बाद असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पिछले तकरीबन 50 सालों से चला आ रहा सीमा विवाद लगभग खत्म हो गया है. कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में इस विवाद को खत्म करने के लिए एक एमओयू यानी समझौता ज्ञापन पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और अरुणाचल प्रदेश के सीएम प्रेमा खांडू ने हस्ताक्षर किए.

दरअसल, असम और अरुणाचल प्रदेश 804 किलोमीटर के आस पास एक लंबी सीमा साझा करते हैं और अरुणाचल प्रदेश को 1972 में केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच यह सीमा विवाद चल रहा था. क्या है इस पूरे विवाद का इतिहास और ये समझौता जिसमें 1972 के लोकल कमीशन की रिपोर्ट को एक प्रकार से दोनों राज्यों की सरकार ने स्वीकार किया है, उसकी अहम बातें क्या हैं, क्या ये समझौता अपने आप मे मुकम्मल है या अब भी कुछ पेंच रह ही जाएंगे? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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केनेडी फ़ॉर प्रेसिडेंट… अमेरिका में 50 साल पहले राष्ट्रपति चुनाव के वक्त ये नारे लगे थे, और अब ऐसा लग रहा है कि इतिहास खुद को दोहराना चाह रहा है. अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन. एफ. केनेडी के भतीजे रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर ने घोषणा कर दी है कि वो डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति जो बाइडेन के खिलाफ़ चुनाव लड़ेंगे. 69 साल के कैनेडी जूनियर का नाता तो वैसे अमेरिका के बड़े राजनीतिक परिवार से है लेकिन उनके लिए ये क्षेत्र नया है. अब तक उनकी पहचान एक एनवायरनमेंट लॉयर की रही थी. जूनियर साल 2005 से वैक्सीन के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे हैं, कोविड वैक्सीन भी उसमें से एक है, इस वजह से वो इंस्टाग्राम और यूट्यूब से बैन हैं और इस वजह से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें वैक्सीन रिव्यू पैनल में रखा था. कैनेडी जूनियर की राजनीतिक विरासत और उनकी ख़ुद की पॉलिटिक्स क्या है, केनेडी जूनियर की चुनाव में एंट्री क्या बाइडेन के लिए भारी पड़ सकती है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.

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