देश भर में सैनिकों को कहीं भी हुई इमरजेंसी तो इस नंबर पर कर सकेंगे कॉल

हेल्पलाइन से मिली रिपोर्ट कार्रवाई के लिए संबंधित यूनिट को भेजी जाएगी. कार्रवाई किए जाने के बाद, केस बंद करने के लिए एक आफ्टर-एक्शन रिपोर्ट सेना मुख्यालय प्रोवोस्ट यूनिट को वापस भेजी जाती है.

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सेना ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर सेना ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

देश भर में सेना अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई मारपीट की घटनाओं और ओडिशा में हुई घटना के बाद (जहां एक सेना अधिकारी और उसकी मंगेतर पर पुलिस द्वारा हमला किया गया था) भारतीय सेना ने सभी रैंकों के लिए एक इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, 155306 शुरू किया है. सेना मुख्यालय प्रोवोस्ट यूनिट में स्थापित यह हेल्पलाइन, “डायल 100” सर्विस की तरह सिंगल-विंडो सिस्टम के रूप में काम करेगी, जो संकट की स्थितियों में मदद और राहत प्रोवाइड करेगी.

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155306 हेल्पलाइन को ट्रैफिक एक्सीडेंट्स, चिकित्सा संकटों, प्राकृतिक आपदाओं, प्रमुख आपराधिक गतिविधियों और तत्काल मदद की जरूरत वाली अन्य इमरजेंसी स्थितियों के दौरान सेना से जुड़े लोगों की सहायता के लिए बनाया गया है. इसे मोबाइल और लैंडलाइन दोनों कॉल रिसीव करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो बड़ी कवरेज और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है.

हेल्पलाइन की अहम बातें

नई लॉन्च की गई हेल्पलाइन की कई विशेषताएं हैं, जो निर्बाध और प्रभावी सहायता देंगी. यह सर्विस 24/7 सर्विस देगी. इसका मैनेजमेंट प्रबंधन सैन्य पुलिस (MPs) और महिला सैन्य पुलिस (WMPs) की पेशेवर रूप से ट्रेन्ड टीम द्वारा चौबीसों घंटे किया जाएगा, जो किसी भी इमरजेंसी में तत्काल प्रतिक्रिया देगी. 
कॉल आइडेंटीफिकेशन और रिकॉर्डिंग क्षमताओं से लैस, हेल्पलाइन सभी इंटरैक्शन को ट्रैक और डॉक्यूमेंट कर सकती है, जिससे सटीक कार्रवाई में सहायता मिलती है. 
हेल्पलाइन में आर्मी स्टेटिक कम्युनिकेशन नेटवर्क (ASCON) के जरिए सभी प्रोवोस्ट यूनिट्स और फॉर्मेशन हेडक्वार्टर (Fmn HQ) से सीधा संपर्क है. इसमें लैंडलाइन कनेक्शन के जरिए सिविल पुलिस और अन्य संबंधित नागरिक विभागों तक भी पहुंच है

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हेल्पलाइन कैसे काम करेगा?

  • कॉल करने वाला शख्स बिना किसी प्रिफिक्स के 155306 डायल करता है.
  • कॉल करने वाले शख्स को अपना सर्विस नंबर, रैंक, नाम और मौजूदा पता बताना होगा. 
  • कॉल करने वाले शख्स द्वारा घटना की जानकारी देनी होगी.
  • हेल्पडेस्क निकटतम प्रोवोस्ट पुलिस स्टेशन को एक्टिव करता है और घटना स्थल पर तत्काल प्रतिक्रिया की रूपरेखा तैयार करता है.
  • सर्विस की निगरानी और केस क्लोजर के लिए फीडबैक प्लान बनाने के लिए कॉल मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर का उपयोग करके प्रतिक्रिया को ट्रैक किया जाता है.

यह हेल्पलाइन इमरजेंसी सर्विस देती है, जिसके लिए कॉलर को खुद की और घटना की जानकारी देनी होगी. इसके बाद हेल्पडेस्क निकटतम पुलिस के साथ कोऑर्डिनेट करता है और कॉल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के जरिए ट्रैक करता है. इस इमरजेंसी सर्विस में गैर-आपाकालीन मामले (भूमि विवाद, वैवाहिक मुद्दे) नही शामिल होंगे.

यह भी पढ़ें: ओडिशा: आर्मी ऑफिसर और मंगेतर के साथ यौन उत्पीड़न का मामला, CID की जांच में मिलीं कई खामियां

हेल्पलाइन से मिली रिपोर्ट उचित कार्रवाई के लिए संबंधित यूनिट को भेजी जाएगी. कार्रवाई किए जाने के बाद, केस बंद करने के लिए एक आफ्टर-एक्शन रिपोर्ट सेना मुख्यालय प्रोवोस्ट यूनिट को वापस भेजी जाती है.

बता दें कि यह हेल्पलाइन केवल इमरजेंसी हेल्प के लिए है, न कि नियमित सैन्य-संबंधी जानकारी के लिए.  155306 हेल्पलाइन की शुरुआत भारतीय सेना के कर्मियों और दिग्गजों के लिए सहायता बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी का प्रतीक है, जो उन्हें इमरजेंसी के वक्त एक विश्वसनीय लाइफलाइन देता है. 

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