India Today Conclave Mumbai: इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर राष्ट्रवाद (Nationalism) और उपनिवेशवाद (colonialism) सहित तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई. पैनल में शामिल लेखक एवं वकील जे. साई दीपक, केजी कृष्णा मेनन और कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, राजपथ को कर्तव्यपथ कर देने सहित प्रधानमंत्री मोदी के एजेंडे पर अपना राय रखी.
राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर देने के फैसले पर जब जे. साईं दीपक से उनकी राय पूछी गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला प्रासंगिक है. नाम का सिर्फ सांकेतिक अर्थ नहीं होता है, इसका बहुत महत्व है. इसका संदेश दूर तक जाता है. मैं इसे इस तरह देखता हूं कि भारत शायद औपनिवेशिक आभा से बाहर निकल चाहता है लेकिन अपनी शर्तों पर. भारत खुद को रिइनवेंट कर रहा है.
इतिहासकार और स्तंभकार केजी कृष्णा मेनन ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि हमने उपनिवेशवाद को काफी पीछे छोड़ दिया है. लेकिन हमें समझ नही आ रहा कि हम आगे कैसे बढ़े. हम शायद भूल रहे हैं कि हम सिविलाइज्ड हैं.
उपनिवेशवाद की बात करना ही रिग्रेसिव सोच
इस कॉन्क्लेव में शिरकत करते हुए कांंग्रेस के पूर्व सांसद संजय निरूपम ने कहा कि जब हम उपनिवेशवाद की बात करते हैं, तो रिग्रेसिव हो रहे होते हैं. हमारी सोच रिग्रेसिव होती है.
निरूपम ने कहा कि आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं, जब भारतीय मूल का शख्स ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बना है. पतंजलि ने ढाई हजार साल पहले जो योगसूत्र लिखे थे, उससे आज पूरी दुनिया योग में रंग गई है. ऐसे युग में उपनिवेशवाद का कोई महत्व नहीं है. लेकिन यह भी समझना होगा कि भारत का इतिहास इससे जुड़ा हुआ है. आज बेशक राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दो लेकिन इससे इतिहास नहीं मिटेगा. सड़क का नाम बदलने से कुछ नहीं होगा. मोरबी में 150 साल पुराना पुल नहीं ढहा था लेकिन सात महीने पहले रिपेयर होकर गिर गया.
हममें संस्कृत भाषा को रिवाइव करने का साहस नहीं
जे साईं दीपक ने कहा कि हमारे पास संस्कृत भाषा को रिवाइव करने का साहस तक नहीं है क्योंकि हम इसे दम तोड़ चुकी भाषा समझते हैं. अतीत और सभ्यता को लेकर हमारी अप्रोच सिलेक्टिव है, जो विचारधारा या वैचारिक खेमों पर आधारित है.
एजी कृष्णा मेनन ने कहा कि हम हमारे अतीत के साथ अन्याय करते हैं. हम कर क्या रहे हैं, विकास के नाम पर ऐतिहासिक स्थानों पर मॉल खड़े कर रहे हैं.
वकील और लेखक जे साईं दीपक ने कहा कि हमारे पास संस्कृति को रिवाइव करने का साहस तक नहीं है क्योंकि हम इसे दम तोड़ चुकी भाषा समझते हैं. अतीत और सभ्यता को लेकर हमारी अप्रोच सिलेक्टिव है, जो विचारधारा या वैचारिक खेमों पर आधारित है.
एजी कृष्णा मेनन ने कहा कि हम हमारे अतीत के साथ अन्याय करते हैं. हम कर क्या रहे हैं, विकास के नाम पर ऐतिहासिक स्थानों पर मॉल खड़े कर रहे हैं. एक तरफ हम अपने अतीत पर गर्व करते हैं लेकिन दूसरी तरफ उससे अन्याय करते हैं.
उन्होंने कहा कि हमें यह सिखाया गया है कि आजादी के बाद उपनिवेशवाद पर बात करने की जरूरत नहीं है. कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने एक याचिका यह कहकर खारिज कर दी थी कि वह अंग्रेजी में नहीं थी. क्या यह मानसिक गुलामी को नहीं दर्शाता?
क्या हिंदू वाकई खतरे में?
निरूपम ने हिंदुत्व को लेकर कहा कि भारत का इतिहास सदियों पुराना है. हमारी सभ्यता विश्व में सबसे पुरानी है. लेकिन कुछ लोग हैं, जो देश में बार-बार डर का माहौल पैदा कर रहे हैं. वे कहते हैं कि हम खतरे में हैं. पहली बार दुनिया में ऐसा देखा गया है कि जो देश में बहुसंख्यक हैं, वे कह रहे हैं कि खतरे में हैं. पांच हजार साल में हिंदू धर्म का कुछ नहीं बिगड़ा तो अब क्या बिगड़ेगा?
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